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ठंड का बाजार धड़ाम, स्टॉक से नहीं निकला हीटर और ब्लोअर

Updated at : 25 Dec 2024 8:30 PM (IST)
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ठंड का बाजार धड़ाम, स्टॉक से नहीं निकला हीटर और ब्लोअर

दिसंबर के अंतिम सप्ताह में भी ठंड नहीं पड़ने के कारण शहर का बाजार मंदी के दौर में है. खासकर गर्म कपड़े और हीटर, ब्लोअर का कारोबार करने वाले व्यवसायी काफी चिंतित है.

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उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुरदिसंबर के अंतिम सप्ताह में भी ठंड नहीं पड़ने के कारण शहर का बाजार मंदी के दौर में है. खासकर गर्म कपड़े और हीटर, ब्लोअर का कारोबार करने वाले व्यवसायी काफी चिंतित है. स्टॉक में करोड़ों का सामान रखा हुआ है, लेकिन खरीदार नहीं है. दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक ठंड की आशंका के कारण स्वेटर, जैकेट, कंबल सहित अन्य ऊनी कपड़ों की अच्छी बिक्री हुई थी. दुकानदारों का अनुमान था कि इस साल कारोबार ग्रोथ पर रहेगा. इस उम्मीद से कर्म कपड़ों का कारोबार करने वाले कई व्यवसायियों ने लुधियाना और पानीपत से ऊनी कपड़ों की दोबारा खेप मंगायी थी, लेकिन ठंड के यू टर्न के कारण स्टॉक गोदाम में ही पड़ा हुआ है. मुजफ्फरपुर कंबल व्यवसाय के क्षेत्र में उत्तर बिहार और नेपाल का प्रमुख बाजार है. यहां लुधियाना और पानीपत के मिलों से कंबल की सप्लाई की जाती है. यहां से पूरे उत्तर बिहार में कंबल का कारोबार होता है. ठंड के सीजन में यहां से करीब 500 करोड़ के कंबल विभिन्न जिलों में जाते हैं, लेकिन इस बार 15 दिसंबर के बाद से ही कंबल की बिक्री में गिरावट आने लगी. कंबल के होलसेल विक्रेता कृष्ण कुमार ड्रोलिया ने कहा कि कंबल का बाजार मंदा हो गया है. अब कंबल का एक महीने का ही बाजार बचा हुआ है. यदि एक सप्ताह के अंदर ठंड अधिक पड़ती है तभी बिक्री में तेजी आएगी.

जैकेट और स्वेटर का बाजार भी फीकाइन दिनों जैकेट और स्वेटर का बाजार भी फीका है. शहर के 100 और 200 में स्वेटर का सेल करने वाले कुछ दुकानों में ग्राहक दिख रहे हैं, लेकिन अन्य रेडिमेड दुकानों और ब्रांडेड कंपनियों के शोरूम में जैकेट के खरीदार नहीं हैं. ठंड नहीं पड़ने के कारण ग्राहक खरीदारी से परहेज कर रहे हैं. दुकानदारों की माने तो शहर के बाजार से ठंड के सीजन में करीब दस करोड़ के जैकेट और स्वेटर की बिक्री होती है, लेकिन इस बार 50 फीसदी भी कारोबार नहीं हो पाया है. जनवरी में ठंड पड़ेगी भी तो बाजार मंदी से ऊबर नहीं पाएगा. जैकेट विक्रेता रौशन नाथानी कहते हैं कि इस बार का बाजार ऐसा होगा, इसकी उम्मीद नहीं थी. ठंड नहीं पड़ने के कारण बाजार फीका है. जनवरी में भी बाजार कैसा रहेगा, यह कहना मुश्किल है.

स्टॉक में पड़ा हीटर और ब्लोअरठंड की संभावना को देखते हुए इलेक्ट्रिक दुकानदारों ने इस बार काफी संख्या में हीटर और ब्लोअर मंगवाए थे, लेकिन इसका बाजार ही अब तक शुरू नहीं हुआ है. दुकानदार इस बात से चिंतित है कि अगर ये उत्पाद नहीं निकले तो उनकी पूंजी एक साल के लिए फंस जाएगी. इससे उन्हें काफी घाटा उटाना पड़ेगा. शहर में हीटर और ब्लोअर का कारोबार भी करीब पांच करोड़ का है, लेकिन बाजार से एक फीसदी भी कारोबार नहीं हुआ है. हीटर और ब्लोअर के दुकानदार प्रमोद जाजोदिया कहते हैं कि ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है कि दिसंबर जा रहा है, लेकिन ठंड नहीं पड़ी है. हमलोगों ने इस उम्मीद से हीटर और ब्लोअर का स्टॉक किया था कि ठंड में अच्छी बिक्री होगी, लेकिन ठंड नहीं पड़ने से अब तक इसका कारोबार ही शुरू नहीं हो पाया है. जनवरी में अगर ठंड में तेजी आती भी है तो पूंजी फंसना तय है. इस बार के सीजन में हमलोग काफी घाटे में हैं.

ठंड के लिए बाजार की तैयारी

कंबल – 500जैकेट और स्वेटर – 10हीटर और ब्लोअर – पांच

(रुपए करोड़ में)

ठंड नहीं पड़ने से गेहूं और सरसो को नुकसान

इस बार अब तक ठंड नहीं पड़ने से गेहूं और सरसो की फसल को नुकसान की आशंका है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भी इस बात का संकेत दिया है कि इस बार ठंड में तापमान ज्यादा होगा. दिसंबर से फरवरी तक न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहेंगे. इस दौरान शीतलहर के दिन भी कम होंगे. गेहूं, सरसों और चना जैसी रबी की फसलें अक्टूबर से दिसंबर तक बोई जाती हैं. इन फसलों को बढ़ने और पकने के लिए ठंडे मौसम की जरूरत होती है. यदि ठंड ठीक से नहीं पड़ी तो इसके उत्पादन पर असर होगा. कांटी के किसान बबलू शाही कहते हैं कि इस बार अब तक ठंड नहीं पड़ने से हमलोगों को भारी नुकसान होगा. इस तरह का मौसम रहेगा तो गेहूं की फसल खराब हो जाएगी़

सुबह और शाम की ठंड कर रही बीमार

इन दिनों सुबह और शाम में ठंड और दोपहर में गर्मी के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं. अक्सर गर्मी के कारण दोपहर में लोग गर्म कपड़ों का उपयोग नहीं कर रहे हैं, जब अचानक शाम में ठंड लगने लगती है तो गर्म कपड़े पहनते हैं. इस कारण शरीर सर्दी ओर गर्मी के अनुकूल नहीं हो पा रहा है. इससे वायरस जनित रोगों की संख्या बढ़ गयी है. अधिकतर लोग इन दिनों सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित हो रहे हैं. इस मौसम में सांस रोग वाले मरीजों की भी परेशानी बढ़ी हुई है. फिजिशयन डॉ नवीन कुमार कहते हैं कि अभी बहुत ठंड नहीं है, लेकिन यह अधिक खतरनाक है. गर्मी और सर्दी का मिलाजुला रूप लोगों को बीमार कर रहा है. ऐसे समय में लोगों को पंखा और एसी का उपयोग नहीं करना चाहिए़. सुबह और शाम पर्याप्त गर्म कपड़े पहनना चाहिए.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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