सिमडेगा: नहीं रहे झारखंड आंदोलनकारी हिलारियुस कुल्लू, इन जनआंदोलनों का किया था नेतृत्व
समाज सुधारक हिलारियुस कुल्लू को श्रद्धांजलि देते ग्रामीण
Jharkhand Andolan Kari Death: सिमडेगा के बांसजोर प्रखंड निवासी वरिष्ठ झारखंड आंदोलनकारी और समाज सुधारक हिलारियुस कुल्लू का 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया. गुरुवार को उनके पैतृक गांव भांवरचाबा में आदिवासी रीति-रिवाज से उनका अंतिम संस्कार किया गया.
सिमडेगा से रविकांत साहू की रिपोर्ट
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Jharkhand Andolan Kari Death, सिमडेगा: सिमडेगा जिले स्थित बांसजोर प्रखंड के भांवरचाबा गांव निवासी वरिष्ठ झारखंड आंदोलनकारी एवं प्रख्यात समाज सुधारक हिलारियुस कुल्लू (80 वर्ष) का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. गुरुवार को उनके पैतृक गांव भांवरचाबा में पूरे राजकीय सम्मान और आदिवासी रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. उनके अंतिम सफर में पूरा गांव उमड़ पड़ा और नम आंखों से इस जुझारू माटी के लाल को अंतिम विदाई दी.
शहीद विलियम लुगुन के सबसे भरोसेमंद साथी थे हिलारियुस
हिलारियुस कुल्लू झारखंड अलग राज्य आंदोलन के अगुआ सह हूल झारखंड क्रांति दल के संस्थापक शहीद विलियम लुगुन के सबसे कर्मठ, ईमानदार और जुझारू साथियों में गिने जाते थे. उन्होंने केवल आंदोलन की मशाल ही नहीं थामी, बल्कि समाज सुधार और भटके हुए लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए जीवनभर काम किया.
1985 में बोंगेरा हाई स्कूल की कराई स्थापना
हिलारियुस कुल्लू का मानना था कि समाज का असली विकास शिक्षा से ही संभव है. उनके अथक प्रयासों, दूरदर्शिता और सरकार के समक्ष रखे गए मजबूत प्रस्ताव के फलस्वरूप ही वर्ष 1985 में बोंगेरा में हाई स्कूल की स्थापना हो सकी थी. इस स्कूल के खुलने से सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के हजारों बच्चों को उच्च शिक्षा का पहला अवसर मिला था.
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जब चोरों के आतंक के खिलाफ खोला मोर्चा और खदेड़ा
इलाके के बुजुर्ग बताते हैं कि हिलारियुस कुल्लू बेहद तेज-तर्रार, निडर और अन्याय के खिलाफ तुरंत आवाज उठाने वाले व्यक्तित्व के धनी थे. वर्ष 1980 से 1983 के दशक में इस पूरे क्षेत्र में चोरों का भारी आतंक था. हालात इतने बदतर थे कि लोग बाजार या दुकान से एक किलो चावल खरीदकर भी सुरक्षित अपने घर नहीं लौट पाते थे. ऐसे खौफ के माहौल में हिलारियुस कुल्लू ने अकेले हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने ग्रामीणों को एकजुट कर चोरों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोला और उन्हें इस पूरे इलाके से खदेड़कर ही दम लिया. इसके अलावा, उन्होंने शहीद विलियम लुगुन के साथ मिलकर ‘रेल रोको आंदोलन’ और ‘जंगल माफियाओं’ के खिलाफ चले कई बड़े जनआंदोलनों का नेतृत्व किया. इस दौरान झारखंड की माटी के हक और हकूक की लड़ाई लड़ते हुए उन्हें कई बार जेल की यातनाएं भी सहनी पड़ी थीं.
अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब, दी गई श्रद्धांजलि
गुरुवार को आयोजित अंतिम संस्कार कार्यक्रम में समाज के हर वर्ग के लोग शामिल हुए. इस दौरान मुख्य रूप से शहीद विलियम लुगुन युवा मोर्चा के अध्यक्ष अनुराग लुगुन, कोषाध्यक्ष रेयाड़न लुगुन, वरिष्ठ आंदोलनकारी मसकल्याण समद, विलियम तोपनो, ग्राम सभा अध्यक्ष ईरेनियुस लुगुन, पूर्व मुखिया जयमिला लुगुन, विनित कुल्लू, इग्नेस कुल्लू सहित भारी संख्या में ग्रामीण, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.
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