Chamki Bukhar: मुजफ्फरपुर में फिर लौटा चमकी बुखार, पिछले साल के पीड़ित बच्चे ही हो रहे बीमार
Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 26 Apr 2025 4:11 PM
चमकी बुखार (सांकेतिक तस्वीर)
Chamki Bukhar: मुजफ्फरपुर जिले में अब तक 11 बच्चे एइएस से पीड़ित हुए हैं. सभी पीड़ित बच्चे एसकेएमसीएच में भर्ती किये गये थे. बीमारी में सुधार होने पर एक-एक कर सभी बच्चों की छुट्टी कर दी गयी है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि वही बच्चे बीमार हो रहे हैं, जो पिछले साल भी एइएस की चपेट में आये थे. फरवरी से ही इन बच्चों में एइएस की पुष्टि होने लगी थी.
विनय कुमार/ मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार (Chamki Bukhar) का लक्षण दिखने पर उन बच्चों का इलाज किया गया है. गोपालगंज से एइएस पीड़ित बच्चे को छोड़ दे तो इस बार कोई भी बच्चा पहली बार एइएस की चपेट में नहीं आया है. हालांकि बच्चों के दोबारा एइएस से पीड़ित होने से स्वास्थ्य विभाग की खामियां उजागर हो रही है. एइएस के प्रोटोकॉल के तहत बीमारी से स्वस्थ होने वाले बच्चों का फॉलोअप करना था. स्वास्थ्य विभाग को एएनएम और आशा के जरिये नियमित अंतराल पर पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य की देखरेख करनी थी, लेकिन पिछले साल गर्मी समाप्त होते ही विभाग ने उन बच्चों के स्वास्थ्य की जांच नहीं की. नतीजा इस बार गर्मी की शुरुआत के साथ ही बच्चे एइएस से पीड़ित हो रहे हैं. वर्ष 2010 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतनी अधिक संख्या में दोबारा बच्चे एइएस से पीड़ित हुए हैं.
पिछले साल 32 बच्चे हुए थे बीमारी से पीड़ित
पिछले साल जिले के 30 बच्चे बीमारी से पीड़ित हुए थे. सभी का इलाज एसकेएमसीएच के पीकू वार्ड में हुआ था. जुलाई तक यहां बच्चे इलाज के लिये भर्ती होते रहे. स्वस्थ होने के बाद सभी को डिस्चार्ज किया गया था. इनमें 11 बच्चे के परिजनों ने पिछली बार की तरह इस बार जागरुकता के लिहाज से बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल नहीं की. बीमार बच्चों के परिजनों ने भी स्वीकार किया कि इस बार गर्मी शुरू होने के बाद उन लोगों ने एइएस के प्रोटोकॉल के हिसाब से बच्चों को नहीं रखा. अब बच्चों की सही तरीके से देखरेख कर रहे हैं.
क्या बोले पदाधिकारी
वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने कहा कि पिछली बार एइएस से पीड़ित होने वाले बच्चे ही अब तक इस बीमारी के शिकार हुए हैं. बच्चों के परिजनों ने एइएस जागरुकता में बतायी गयी जानकारी के हिसाब से बच्चों को नहीं रखा था. इस कारण बच्चे दोबारा बीमार हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर गांव में चौपाल लगा कर एइएस से बचाव की जानकारी दी जा रही है.
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By Radheshyam Kushwaha
राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.
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