उत्तर बिहार की राजनीति का गढ़ मुजफ्फरपुर: न ''माई'' काम आयी, न ''मुनिया''

मुजफ्फरपुर : उत्तर बिहार की राजनीति का गढ़ माने जाने वाले मुजफ्फरपुर में एक बार फिर जातीय बंधन की दीवार टूटती नजर आयी. अजय निषाद की ऐतिहासिक जीत ने जेल में बंद रहते हुए चुनाव लड़े समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस की जीत की याद दिला दी. मोदी फैक्टर से जहां एक ओर जातीय समीकरण ध्वस्त […]
मुजफ्फरपुर : उत्तर बिहार की राजनीति का गढ़ माने जाने वाले मुजफ्फरपुर में एक बार फिर जातीय बंधन की दीवार टूटती नजर आयी. अजय निषाद की ऐतिहासिक जीत ने जेल में बंद रहते हुए चुनाव लड़े समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडीस की जीत की याद दिला दी.
मोदी फैक्टर से जहां एक ओर जातीय समीकरण ध्वस्त होते नजर आया, वहीं दूसरी ओर मोदी की विकास को विकास योजनाओं को हर तबके और वर्ग के लोगों ने स्वीकारा है. नतीजा, महागठबंधन का न माई (मुस्लिम-यादव) फैक्टर चला, न ही मुनिया (मुस्लिम-निषाद-यादव) का समीकरण असर दिखा सका.
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