मुजफ्फरपुर : डीईआईसी भवन बन गया आशा के लिए ट्रेनिंग सेंटर
Updated at : 10 Feb 2019 9:37 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : सदर अस्पताल में बीमार बच्चों को एक ही छत के नीचे इलाज की सुविधा मिले, इसके लिए बना डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेशन सेंटर अब आशा का ट्रेनिंग सेंटर बन कर रह गया है. पिछले दस माह से बने इस भवन में बच्चों का इलाज इसलिए नहीं हो पा रहा है कि इनमें इलाज की […]
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मुजफ्फरपुर : सदर अस्पताल में बीमार बच्चों को एक ही छत के नीचे इलाज की सुविधा मिले, इसके लिए बना डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेशन सेंटर अब आशा का ट्रेनिंग सेंटर बन कर रह गया है. पिछले दस माह से बने इस भवन में बच्चों का इलाज इसलिए नहीं हो पा रहा है कि इनमें इलाज की सामग्री और डॉक्टर व नर्स की प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है.
डीपीएम बीपी वर्मा कहते हैं कि मुख्यालय को भवन तैयार होने की सूचना दस माह पहले ही दे दी गयी है. बहाली स्टेट से ही होनी है और इलाज की सामग्री भी वहीं से खरीदारी होनी है. संसाधन नहीं होने के कारण तत्काल इसे आशा ट्रेनिंग सेंटर बना दिया गया.
दस डॉक्टरों की होनी है बहाली : इस सेंटर में फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, डेंटिस्ट आदि दस विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहाली होनी है. इसके लिए वर्ष 2018 के अक्तूबर में बहाली के लिए विज्ञापन भी निकाला गया था. इसमें सात डॉक्टरों ने आवेदन दिया था. पांच डॉक्टरों का सेलेक्शन हो गया है, लेकिन किसी भी डॉक्टर योगदान नहीं किया है.
96 लाख से बना है भवन : सदर अस्पताल में बीमार बच्चों के लिए बना डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेशन सेंटर 96 लाख की लागत से बना है. केंद्र सरकार का डीईआइसी खोलने का उद्देश्य था कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिह्नित गंभीर रूपसे बीमार बच्चों को इलाज के लिए सदर अस्पताल के डाॅक्टरों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. समय पूर्व पैदा होनेवाले बच्चों के इलाज की विशेष सुविधा इस सेंटर पर होगी.
एक ही छत के नीचे जांच से लेकर हर सुविधा
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सकों की टीम स्कूलों में भ्रमण कर बीमार बच्चों का चिह्नित करने के बाद जो बच्चे गंभीर बीमारियों से पीड़ित मिलते हैं, उन्हें उपचार के लिए सीएचसी व पीएचसी ला या जाता है.
अति गंभीर बीमार बच्चों को उपचार के लिए हर शनिवार को सदर अस्पताल लाना पड़ता है. यहां आरबीएसके टीम द्वारा लाये गये बच्चों को अलग-अलग डाॅक्टरों का चक्कर लगाना पड़ता है. इस समस्या को देखते आरबीएसके टीम द्वारा चयनित गंभीर बीमार बच्चों को एक ही छत के नीचे सभी विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार की सुविधा मिले, इसी के लिए यह सेंटर खोला गया था.
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