मुजफ्फरपुर : ऑटो टिपर घोटाला - निगरानी की टीम का नगर निगम में धावा, बिना रिसीव 19 टिपर का हुआ भुगतान, पांच घंटे तक तीन कर्मियों से पूछताछ

Updated at : 24 Jan 2019 4:31 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर :  ऑटो टिपर घोटाला -  निगरानी की टीम का नगर निगम में धावा, बिना रिसीव 19 टिपर का हुआ भुगतान,  पांच घंटे तक तीन कर्मियों से पूछताछ

मुजफ्फरपुर : 3.85 करोड़ रुपये के ऑटो टिपर घोटाले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम आरोपितों के विरुद्ध साक्ष्य एकत्रित करने में जुटी है. इसी क्रम में बुधवार को निगरानी टीम मुजफ्फरपुर नगर निगम में पहुंची. डीएसपी मो खलील के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने करीब पांच घंटे तक बंद कमरे में तीन कर्मियों […]

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मुजफ्फरपुर : 3.85 करोड़ रुपये के ऑटो टिपर घोटाले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम आरोपितों के विरुद्ध साक्ष्य एकत्रित करने में जुटी है. इसी क्रम में बुधवार को निगरानी टीम मुजफ्फरपुर नगर निगम में पहुंची. डीएसपी मो खलील के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने करीब पांच घंटे तक बंद कमरे में तीन कर्मियों से पूछताछ की. साथ ही नगर आयुक्त संजय दुबे का बयान भी दर्ज किया.

निगरानी की टीम ने पूर्व बहलखाना प्रभारी नूर आलम, वर्तमान बहलखाना प्रभारी रामलखन सिंह व सहायक प्रभारी डार्विन कुमार से टिपर को रिसीव करने के बारे में पूछताछ की. पहले फेज में आपूर्ति के बाद भुगतान किये गये 24 ऑटो टिपर के रिसीव करने में हेरा-फेरी का मामला मिला. पहले फेज के 24 में से सिर्फ पांच टिपर का ही रिसीविंग मिला है.
बिना रिसीव के ही 19 टिपर का भुगतान तत्कालीन नगर आयुक्त डॉ रंगनाथ चौधरी द्वारा कर दिया गया. तीनों कर्मियों से दूसरे फेज के 26 टिपर के रिसीविंग के बारे में पूछताछ की गयी. मालूम हो कि ये तीनों इस मामले में आरोपित नहीं हैं. इनके बयान और जब्त कागजातों के अध्ययन के बाद निगरानी तय करेगी कि इन्हें सरकारी गवाह बनाया जाये या मामले में आरोपित किया जाये. इस मामले में विजिलेंस कोर्ट से एडीएम डा रंगनाथ चौधरी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है.
45 दिनों के बाद हुई 26 टिपर की आपूर्ति
टेंडर के बाद कंपनी को 45 दिनों के अंदर 50 टिपर की आपूर्ति करनी थी. 24 टिपर की आपूर्ति तो 45 दिनों के अंदर कर दी गयी, लेकिन 26 टिपर की आपूर्ति 45 दिनों के बाद हुई है. निगरानी सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को पूछताछ के दौरान कर्मियों ने तत्कालीन नगर आयुक्त पर कार्रवाई का डर दिखा रिसीव कराने का आरोप लगाया है.
आपने किसके आदेश पर ऑटो टिपर को रिसीव किया.
तत्कालीन नगर आयुक्त के मौखिक आदेश पर हमने ऑटो टिपर को रसीव किया.
आपको पता था कि खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई. फिर क्यों रिसीव किया?
मुझे इसकी जानकारी उस समय नहीं थी. नगर आयुक्त हमारे पदाधिकारी हैं. उन्होंने आदेश किया. रिसीव नहीं करते, तब वे अनुशासनहीनता का आरोप लगा मुझे निलंबित भी कर सकते थे. पहले मैंने इनकार किया था, लेकिन वे जब कार्रवाई की चेतावनी देने लगे, तब हमने रिसीव किया. घोटाला हुआ.
रिसीव करने में आप भी फंसेगे. आपको भी जेल जाना पड़ेगा.
मैं इसमें कही भी दोषी नहीं हूं. मैं एक छोटा कर्मचारी हूं. जो भी किया ऊपर के आदेश पर किया.
एक ही दिन 1.52 करोड़ के चेक काटे गये
नगर आयुक्त संजय दूबे ने निगरानी को वही बयान दिये, जो उन्होंने पूर्व में कहा था. उन्होंने निगरानी से कहा कि सरकार से नगर आयुक्त को 3.50 करोड़ तक की निविदा स्वीकृत करने का अधिकार है, लेकिन ऑटो टिपर के 3.82 करोड़ रुपये के निविदा को नगर आयुक्त ने अपने स्तर से स्वीकृत कर दिया. इससे वित्तीय अनियमितता प्रतीत होता है.
इतना ही नहीं संविदा पर बहाल कनीय अभियंता को क्रय समिति में शामिल कर नियम का उल्लंघन किया गया है. उन्होंने सरकार के आदेश पर मोटर यान निरीक्षक से आपूर्ति करायी गयी टिपर की जांच में मिली तकनीकी गड़बड़ी से संबंधित पत्र भी विजिलेंस को सौंपे हैं. आगे बताया कि जिस दिन (16 जनवरी 2018) को उनकी मुजफ्फरपुर नगर निगम में तैनाती हुई, ठीक उसी दिन आनन-फानन में 24 ऑटो टिपर के एवज में प्रभारी नगर आयुक्त रंगनाथ चौधरी ने 1.52 करोड़ 70 हजार 848 रुपये का चेक काट भुगतान कर दिया.
मेयर समेत दस हैं नामजद आरोपित
मेयर सुरेश कुमार, पूर्व नगर आयुक्त सह एडीएम डॉ रंगनाथ चौधरी, रमेश प्रसाद रंजन, पूर्व कार्यपालक अभियंता बिंदा सिंह, सहायक अभियंता नंद किशोर ओझा, महेंद्र सिंह, कनीय अभियंता क्यामुद्दीन अंसारी, डूडा के बर्खास्त कनीय अभियंता भरत राज चौधरी, प्रमोद कुमार व मौर्या मोटर्स पाटलिपुत्रा.
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