साहित्य व राजनीित दोनों में थी पद्माशा की धाक
Updated at : 07 Jul 2018 5:03 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर : साहित्यकार, शिक्षाविद और राजनेता पद्माशा झा ने बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की छात्रा से प्रोवीसी तक का सफर तय किया. लंबी बीमारी के बीच शुक्रवार की शाम एम्स में उनका निधन हो गया. बीमारी के दिनों में भी उनके अंदर आत्मविश्वास था. उनके करीबी बताते हैं कि अक्सर मिलने पर कहती थीं कि जल्द […]
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मुजफ्फरपुर : साहित्यकार, शिक्षाविद और राजनेता पद्माशा झा ने बीआरए बिहार विश्वविद्यालय की छात्रा से प्रोवीसी तक का सफर तय किया. लंबी बीमारी के बीच शुक्रवार की शाम एम्स में उनका निधन हो गया. बीमारी के दिनों में भी उनके अंदर आत्मविश्वास था.
उनके करीबी बताते हैं कि अक्सर मिलने पर कहती थीं कि जल्द ही स्वस्थ होकर साहित्य और राजनीति की सेवा के लिए लौट रही हैं. हालांकि वे वादा पूरा नहीं कर सकीं.
कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री व पूर्व विधान पार्षद पद्माशा झा ने एमडीडीएम कॉलेज से पढ़ाई की और 80 के दशक में लेक्चरर के रूप में सेवा की शुरुआत की. इसके बाद वे बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग में अध्यक्ष बनीं. ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी में वे प्रोवीसी बनीं, फिर कुलपति के प्रभार में भी रहीं. 2012-13 में बीआरएबीयू की प्रोवीसी की जिम्मेदारी मिली. साहित्य के क्षेत्र में उनका सफर शानदार रहा. कविता संग्रह भाषा से नंगे हाथों तक व पलास वन: मत बांधों आकाश के साथ ही कहानी संग्रह छोटे शहर की शकुंतला व तुम बहुत याद आओगे है. उन्हें कई अवार्ड भी मिल चुका है.
शिक्षाविद् के
साथ सफल राजनेता की बनायी पहचान
कविता संग्रह
भाषा से नंगे हाथों तक व पलास वन: मत बांधों आकाश के साथ ही कहानी संग्रह छोटे शहर की शकुंतला व तुम बहुत याद आओगे
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