ईरान का आरोप: US-इजरायल से हो रहे अरब देशों पर अटैक, यूज कर रहे नकली शाहेद ड्रोन

Updated at : 15 Mar 2026 1:03 PM (IST)
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Iran alleges US Israel false-flag attacks on Arab countries using Copied Shahed drones

नकली शाहेद ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं अमेरिका-इजरायल.

Iran War US False Drone Attack: ईरान ने आरोप लगाया है कि अरब देशों पर हमला करने के लिए उसके शाहेद ड्रोन की कॉपी का इस्तेमाल किया जा रहा है. इन हमलों से मिडिल ईस्ट के देशों के सिविल एरियाज को टारगेट किया जा रहा है.

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Iran War US False Drone Attack: मिडिल ईस्ट में 28 फरवरी 2026 को जंग शुरू हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के ऊपर एयरस्ट्राइक की. इस हमले के तुरंत बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की. इजरायल और मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए उसने युद्ध का दायरा बढ़ा दिया. हालांकि, अब ईरान ने अमेरिका और इज़रायल पर आरोप लगाया है. ईरान का दावा है कि उसके ड्रोन की कॉपी बनाकर मिडिल ईस्ट के देशों के नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले के लिए किया जा रहा है, ताकि जानबूझकर इसका आरोप इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर लगाया जा सके.

रविवार को ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रेस टीवी पर खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने अपना बयान दिया. उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया है कि वे ईरान के शाहेद-136 ड्रोन के रीब्रांडेड संस्करण ‘लुकास’ का इस्तेमाल कर फॉल्स-फ्लैग अभियान चला रहे हैं.

अपने आधिकारिक बयान में प्रवक्ता ने कहा कि सैन्य चुनौतियों का सामना करने और तेहरान के खिलाफ राजनीतिक गठबंधन बनाने में विफल रहने के बाद दुश्मन अब धोखे और भ्रामक रणनीतियों का सहारा ले रहा है.

बयान के अनुसार, इन गतिविधियों का उद्देश्य ‘संदेह पैदा करना और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान पर आरोप लगाना’ है, साथ ही तेहरान और उसके क्षेत्रीय साझेदारों के बीच संबंधों को नुकसान पहुंचाना भी है.

प्रवक्ता ने हाल ही में पड़ोसी देशों जैसे तुर्किये, कुवैत और इराक में हुई कई ‘संदिग्ध हमलों’ का भी जिक्र किया. उनका कहना था कि पश्चिमी मीडिया और शत्रुतापूर्ण ताकतों ने गलत तरीके से इन घटनाओं के लिए ईरानी बलों को जिम्मेदार ठहराया है.

ईरान के अटैक केवल अमेरिका और इजरायल पर

उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि ईरान की सैन्य गतिविधियां अत्यंत अनुशासित हैं और केवल विशिष्ट लक्ष्यों तक सीमित रहती हैं. प्रवक्ता ने कहा, ‘जैसा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान कई बार घोषित कर चुका है, वह केवल यूनाइटेड स्टेट्स और जायनिस्ट शासन (इजरायल) के ठिकानों, केंद्रों और हितों को निशाना बनाता है, और जिस भी स्थान को निशाना बनाता है उसकी जिम्मेदारी आधिकारिक बयान जारी कर स्वीकार करता है.’

प्रेस टीवी द्वारा प्रसारित इस बयान में क्षेत्रीय देशों से अधिक सहयोग की अपील भी की गई. इसमें कहा गया, ‘जरूरी है कि हम एक-दूसरे पर भरोसा करें और एकता व सहयोग बनाए रखकर आक्रामक दुश्मन को इन चालों और खतरनाक व्यवहारों से रोकें.’

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ईरान ने ब्रिटेन सरकार के बयान का दिया हवाला

यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आई है जब संघर्ष के दौरान मिडिल ईस्ट के कई देशों के आवासीय इलाकों और राजनयिक ठिकानों पर कई ड्रोन हमले हुए हैं. तेहरान लगातार यह कहता रहा है कि गैर-सैन्य लक्ष्यों पर हुए हमलों में उसका कोई हाथ नहीं है.

इस दावे के समर्थन में प्रवक्ता ने 3 मार्च को यूनाइटेड किंगडम के रक्षा मंत्रालय की पुष्टि का हवाला दिया. इसमें कहा गया था कि साइप्रस में स्थित आरएएफ अक्रोतिरी एयरबेस पर हमला करने वाला ड्रोन ईरान से लॉन्च नहीं किया गया था.

अराघची ने भी लगाया आरोप

इसके अलावा अब्बास अराघची के पहले दिए गए बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि इजरायल ने अजरबैजान में ड्रोन हमलों को अंजाम देकर तेहरान के विदेशी संबंधों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की.

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ताजा घटना शनिवार को इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित लानाज रिफाइनरी पर हुए हमले की है. ईरानी सैन्य सूत्रों ने कहा है कि इस हमले का ईरान या उसके सहयोगियों से कोई संबंध नहीं है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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