ईरान युद्ध: ‘यूरोप के प्लेग्राउंड’ का बड़ा फैसला, US मिलिट्री विमानों के लिए बंद किया एयरस्पेस 

Updated at : 15 Mar 2026 10:51 AM (IST)
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US Iran War Switzerland Closes its Airspace For American Military Aircraft Citing Neutrality

अमेरिकी एयरफोर्स का विमान. फोटो- एक्स (@MarioNawfal)

US Iran War: स्विट्जरलैंड ने ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने की घोषणा की है. स्विस गवर्नमेंट ने इसके पीछे की वजह सशस्त्र संघर्षों में अपनी लंबे समय से चली आ रही तटस्थता की नीति का हवाला दिया है.

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US Iran War: ईरान के ऊपर 28 फरवरी से अमेरिका लगातार हमले कर रहा है. उसके सैन्य ठिकाने हों या ऑयल टर्मिनल या फिर कोई गुप्त जगह, अमेरिकी फाइटर जेट, मिसाइलें और ड्रोन ईरान को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसी बीच यूरोप के प्लेग्राउंड- स्विट्जरलैंड ने बड़ा फैसला किया है. स्विट्जरलैंड ने ईरान युद्ध में शामिल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने का ऐलान किया है.  स्विट्जरलैंड  ने यह निर्णय उसकी सशस्त्र संघर्षों में लंबे समय से चली आ रही तटस्थता (न्यूट्रैलिटी) की नीति का हवाला देते हुए लिया. 

शनिवार को स्विस सरकार ने जारी एक बयान में कहा कि 15 मार्च को अमेरिकी टोही विमानों को स्विट्जरलैंड के ऊपर से उड़ान भरने की दो अनुमति-प्रार्थनाएं खारिज कर दी गईं, क्योंकि वे सीधे तौर पर ईरान में चल रहे युद्ध से जुड़ी थीं. हालांकि, अधिकारियों ने अमेरिका की तीन अन्य उड़ानों को मंजूरी दे दी है. इनमें 15 मार्च को निर्धारित दो परिवहन विमान और 17 मार्च को प्रस्तावित एक मेंटेनेंस से जुड़ी उड़ान शामिल है.

यह फैसला स्विस फेडरल काउंसिल ने संघीय नागरिक उड्डयन कार्यालय (FOCA) को भेजे गए ओवरफ्लाइट अनुरोधों की समीक्षा के बाद लिया. FOCA अन्य संघीय विभागों के साथ मिलकर राजनयिक मंजूरी से जुड़े आवेदनों को प्रोसेस करता है. स्विट्जरलैंड ने यह भी स्पष्ट किया कि मानवीय या चिकित्सीय उद्देश्यों से होने वाली उड़ानों- जैसे घायल लोगों को ले जाने वाली उड़ानें को उसकी तटस्थता नीति के तहत अनुमति मिलती रहेगी.

यूरोप का प्लेग्राउंड क्यों कहा जाता है स्विट्जरलैंड?

स्विट्जरलैंड को ‘यूरोप का प्लेग्राउंड’ कहा जाता है, क्योंकि यहां प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटन और एडवेंचर गतिविधियों के भरपूर अवसर हैं. आल्प्स की बर्फ से ढकी पहाड़ियां, साफ झीलें और खूबसूरत घाटियां इसे टूरिस्ट्स के लिए सालभर आकर्षक बनाती हैं. सर्दियों में यहां स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग जैसे खेल होते हैं, जबकि गर्मियों में हाइकिंग, माउंटेन बाइकिंग और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियां लोकप्रिय हैं. यहां बड़ी संख्या में  लोग छुट्टियां और मनोरंजन के लिए आते हैं, इसलिए इसे ‘यूरोप का प्लेग्राउंड’ कहा जाता है.

विश्व युद्धों में भी न्यूट्रल रहा था स्विट्जरलैंड

इसके अलावा स्विट्जरलैंड लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय युद्धों में तटस्थ (न्यूट्रल) रहा है और बड़े युद्धों में हिस्सा नहीं लेता, जिससे यह देश शांति और पर्यटन का केंद्र बना रहा. स्विट्जरलैंड ने न तो पहले विश्व युद्ध और न ही द्वितीय विश्व युद्ध में किसी पक्ष के साथ युद्ध में हिस्सा लिया. 1815 से अपनाई गई उसकी स्थायी तटस्थता (न्यूट्रैलिटी) की नीति के कारण उसने दोनों विश्व युद्धों के दौरान अपनी सीमाओं को सुरक्षित रखते हुए खुद को संघर्ष से दूर रखा. 

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हालांकि, तटस्थ रहने के बावजूद उसने मजबूत रक्षा तैयारियां बनाए रखीं और लगभग 4.3 लाख सैनिकों की सेना को सक्रिय रखा, जिसे ‘नेशनल रिडबॉट’ रणनीति के तहत तैयार किया गया था. इसके साथ ही, स्विट्जरलैंड ने मानवीय भूमिका निभाते हुए एक लाख से अधिक शरणार्थियों को शरण दी और चारों ओर से धुरी शक्तियों से घिरे होने के बावजूद अपनी मजबूत रक्षा रणनीति के कारण सुरक्षित बना रहा.

ईरान युद्ध से प्रभावित हो रहा ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन

स्विट्जरलैंड की तटस्थता (न्यूट्रैलिटी) की नीति फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध तीसरे हफ्ते में पहुंच चुका है. 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में पूरे मिडिल ईस्ट में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश (1300 से ज्यादा) ईरान के नागरिक हैं. 

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इस युद्ध के कारण ईरन ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान किया था. जिसकी वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं. हालांकि, शनिवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबके लिए खुला है, केवल दुश्मनों- अमेरिका और इजरायल को छोड़कर. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर देशों से इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक बल भेजने की अपील की है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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