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मन की कलुषता व विकार ही हमें इस सांसारिक बंधन में बांधे हुए है : स्वामी निरंजनानंद

Updated at : 08 Jul 2025 7:10 PM (IST)
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मन की कलुषता व विकार ही हमें इस सांसारिक बंधन में बांधे हुए है : स्वामी निरंजनानंद

हम अच्छा बनने का प्रयास करेंगे और अच्छा करने का प्रयास करेंगे तब हम अडिग सत्य की अनुभूति अपने भीतर कर पायेंगे

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मंगेर योग विद्यालय के परमाचार्य स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने सद्गुरु गायत्री पर अपनी व्याख्या में कहा कि हमारे मन की कलुषता और हमारे मन के विकार ही हमें इस संसार में बांधे हुए है. इस सांसारिक बंधन से हमें शिवत्व ही मुक्त कराते हैं. वे मंगलवार को संन्यास पीठ पादुका दर्शन में चल रहे गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. स्वामी निरंजनानंद ने कहा कि सद्गुरु गायत्री के दूसरे भाग सत्यानंदाय धीमहि का अर्थ है कि मैं उन सभी के प्रति सजग बनूं जो सरल है, जो निश्छल है और जो वास्तविक है. उन्होंने कहा कि सत्य के साक्षात्कार से ही मन के सारे अभाव भस्म हो जाते है. मन के सारे विकास समाप्त हो जाते और यह साक्षात्कार सेवा, प्रेम और दान के द्वारा ही संभव है. जब हम अच्छा बनने का प्रयास करेंगे और अच्छा करने का प्रयास करेंगे तब हम अडिग सत्य की अनुभूति अपने भीतर कर पायेंगे. साथ ही सभी के भीतर दिव्यता को भी अनुभव कर पायेंगे. आत्मभाव महसूस कर पायेंगे. गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में सत्संग के साथ-साथ आश्रम संन्यासियों द्वारा मंत्राें व स्तोत्रों का पाठ किया गया. जिससे पूरा परिसर ऊर्जा व आनं से भरपुर रहा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु नर-नारी इस कार्यक्रम में भाग लिये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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BIRENDRA KUMAR SING

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By BIRENDRA KUMAR SING

BIRENDRA KUMAR SING is a contributor at Prabhat Khabar.

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