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संवेदनहीनता : घाव में लगा कीड़ा, दर्द से अस्पताल के खुले गोलंबर में कराहता रहा मरीज

Updated at : 08 Sep 2025 7:21 PM (IST)
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संवेदनहीनता : घाव में लगा कीड़ा, दर्द से अस्पताल के खुले गोलंबर में कराहता रहा मरीज

घाव पर मरहम पट्टी पर उसे मॉडल अस्पताल के दूसरे तल पर बने पुरूष वार्ड में भर्ती कर दिया,

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– मॉडल अस्पताल में मरीजों की देखभाल का दिखा काला सच

मुंगेर

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कहने को तो मुंगेर सदर अस्पताल अब आधुनिक सुविधाओं के साथ अत्याधुनिक संसाधनों से न केवल लैस हो रहा है, बल्कि मरीजों को भी इन सुविधा का लाभ मिल रहा है, लेकिन मुंगेर सदर अस्पताल में लगभग 32 करोड़ की लागत से बने मॉडल अस्पताल में मरीजों के देखभाल का जो काला सच सोमवार को दिखा. वह खुद स्वास्थ्य विभाग के कई व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है. सोमवार को जब सदर अस्पताल में सबसे अधिक भीड़ होती है. उस समय अस्पताल उपाधीक्षक कार्यालय के सामने बने गोलंबर में एक 60 वर्षीय वृद्ध तड़तपा रहा. जिसके पैर के घाव में कीड़ा लग चुका था और उसके दर्द से वह जमीन पर ही अधमरे हालत में लेटा रहा.

एक सप्ताह पूर्व समाजी द्वारा लाया गया था अस्पताल

बताया गया कि शहर के एक समाज सेवक द्वारा वृद्ध को सड़क किनारे तड़पता देखने के बाद अस्पताल पहुंचा गया था. जहां वृद्ध ने अपना नाम 60 वर्षीय सतीश कुमार तथा पता शेखपुरा जिला बताया. जिसके बाद इमरजेंसी वार्ड में उसके घाव पर मरहम पट्टी पर उसे मॉडल अस्पताल के दूसरे तल पर बने पुरूष वार्ड में भर्ती कर दिया, लेकिन इसके बाद उसका देखभाल करने वाला कोई नहीं होने के कारण न तो उसके जख्म का ड्रेसिंग दोबारा हो पाया और न ही उसके घाव के लिये कोई दवा ठीक से दिया जा सकता. इस बीच एक सप्ताह बाद सतीश कुमार दर्द से तड़पता हुआ अधमरे हालत में अस्पताल उपाधीक्षक कार्यालय के समाने बने गोलंबर में पड़ा था. जिसके आसपास मक्खियां भिनभिना रही थी. अब संवेदनहीनता का आलम यह दिखा की घंटों वहां पड़ने रहने के बावजूद किसी की नजर सतीश कुमार पर नहीं पड़ी.

वार्ड में मरीज का नहीं मिला पर्चा

सदर अस्पताल में मरीज को देखने वाला यदि कोई नहीं हो तो उसका देखभाल भी भगवान भरोसे ही है. इसे केवल इसी से समझा जा सकता है कि सतीश कुमार को वैसे तो इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद पुरूष वार्ड में भर्ती किया गया था, लेकिन सोमवार को जब वार्ड में उसके भीएचटी की छानबीन की गयी तो वह वार्ड में था ही नहीं. अब ऐसे में उसका पूरे सप्ताह क्या इलाज हुआ या उसे क्या दवाएं दी गयी. इसकी जानकारी शायद ही अस्पताल प्रबंधन को पता हो.

कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक

अस्पताल उपाधीक्षक डॉ निरंजन कुमार ने बताया कि उक्त मरीज मानसिक रूप से कमजोर है. उसे वार्ड में भर्ती कराया गया था, लेकिन वह वहां से नीचे आ गया. जिसे दोबारा साफ कर उसके घाव की ड्रेसिंग करायी गयी है. साथ ही उसे वार्ड में भर्ती किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMIT JHA

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By AMIT JHA

AMIT JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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