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एमयू के कॉलेजों में विज्ञान व वाणिज्य विषयों से दूर हो रहे विद्यार्थी

Updated at : 04 Oct 2025 6:16 PM (IST)
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एमयू के कॉलेजों में विज्ञान व वाणिज्य विषयों से दूर हो रहे विद्यार्थी

मुंगेर विश्वविद्यालय भले ही अपने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा देने का दावा करता हो, लेकिन हकीकत में एमयू के कॉलेजों की बदहाल हालत के कारण विद्यार्थी नामांकन से कतरा रहे हैं

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कॉलेजों में बदहाल प्रयोगशाला व लाइब्रेरी घटा रहे नामांकन, 70 प्रतिशत से अधिक सीटें रिक्त

मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय भले ही अपने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा देने का दावा करता हो, लेकिन हकीकत में एमयू के कॉलेजों की बदहाल हालत के कारण विद्यार्थी नामांकन से कतरा रहे हैं. इसे केवल इसी बात से समझा जा सकता है कि कॉलेजों में बदहाल प्रयोगशाला व लाइब्रेरी के कारण वर्तमान के डिजिटल युग में विद्यार्थी विज्ञान एवं वाणिज्य जैसे विषयों से दूर हो रहे हैं. हाल यह है कि एमयू के कॉलेजों में सत्र 2025-29 स्नातक सेमेस्टर-1 में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय में 70 प्रतिशत से अधिक सीटें रिक्त रह गयी हैं.

15 हजार सीटों पर 5,974 विद्यार्थियों ने आवेदन किया

बता दें कि एमयू द्वारा अपने 33 अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों में सत्र 2025-29 स्नातक सेमेस्टर-1 में नामांकन लगभग 4 माह लंबी प्रक्रिया के बाद पूर्ण की गयी. इस दौरान जहां उक्त सत्र में नामांकन को लेकर विज्ञान संकाय में लगभग 15 हजार सीटों पर 5,974 विद्यार्थियों ने आवेदन किया. वहीं वाणिज्य संकाय के लगभग 3 हजार सीटों पर 421 विद्यार्थियों ने आवेदन किया. जिसके बाद उक्त सत्र के विज्ञान संकाय में 5,579 विद्यार्थियों ने ही नामांकन लिया. जबकि वाणिज्य संकाय में 398 विद्यार्थियों ने ही नामांकन लिया. हद तो यह है कि इसके बाद उक्त सत्र के विज्ञान संकाय में जहां मात्र 5,064 विद्यार्थियों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया. वहीं वाणिज्य संकाय में मात्र 359 विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया.

प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए मिले थे दो लाख

एमयू के अंतर्गत पांच जिले मुंगेर, जमुई, खगड़िया, लखीसराय व शेखपुरा में कुल 33 अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेज हैं. जिसमें अधिकांश कॉलेजों में लाइब्रेरी व प्रयोगशालाओं की स्थिति बदहाल है. हाल यह है कि कई कॉलेजों में तो लाइब्रेरी व प्रयोगशालाओं में न तो नियमित रूप से शिक्षक हैं और न ही कर्मी. जबकि प्रयोगशालाओं में सालों से प्रायोगिक उपकरण तथा कैमिकल तक नहीं है. हलांकि साल 2021 में विश्वविद्यालय द्वारा कॉलेजों को प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए दो लाख तथा लाइब्रेरी के लिए एक लाख की राशि दी गयी, लेकिन कॉलेजों के उदासीन रवैये के कारण इन राशि का उपयोग प्रयोगशालाओं और लाइब्रेरी को सुदृढ़ करने के लिये नहीं किया गया. जिसके कारण अबतक कॉलेजों में प्रयोगशाला व लाइब्रेरी की स्थिति बदहाल है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RANA GAURI SHAN

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By RANA GAURI SHAN

RANA GAURI SHAN is a contributor at Prabhat Khabar.

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