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सीनेट बैठक की रिर्पोट को लेकर राजभवन ने दिया दिशा-निर्देश

सीनेट बैठक की रिर्पोट को लेकर राजभवन ने दिया दिशा-निर्देश

– नये वित्तीय वर्ष का दूसरा महीना समाप्त होने के बाद भी नहीं हो पाया है छठा सीनेट

मुंगेर. राजभवन द्वारा कुलाधिपति के निर्देश पर सभी विश्वविद्यालयों को सीनेट बैठक की रिर्पोट भेजने को लेकर दिशा-निर्देश दिया गया है. राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चोंग्थू ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र भेजा है. हलांकि नये वित्तीय का दूसरा महीना समाप्त होने के बावजूद मुंगेर विश्वविद्यालय अबतक अपना छठा सीनेट बैठक नहीं करा पाया है. राज्यपाल के प्रधान सचिव द्वारा भेजे गये पत्र में कहा गया है कि राज्यपाल-सह-कुलाधिपति की अध्यक्षता में सम्पन्न बैठक के उपरान्त सभी विश्वविद्यालयों द्वारा बैठक की कार्यवाही के अनुमोदन का प्रस्ताव, बैठक की कार्यवाही के साथ कार्यालय को भेजा जाता है. प्रायः ऐसा देखा जाता है कि इसमें एकरूपता नहीं रहती है. किसी कार्यवाही में विश्वविद्यालय के किसी पदाधिकारी: का हस्ताक्षर नहीं रहता है, तो किसी में बिन्दुवार लिये गये निर्णय का उल्लेख नहीं रहता है. किसी कार्यवाही में उपस्थित सदस्यों का उल्लेख नहीं रहता है, तो किसी में माननीय राज्यपाल-सह-कुलाधिपति, बिहार द्वारा किये गये संबोधन को भी अंकित किया जाता है. वर्णित स्थिति में राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के निर्देशानुसार पत्र के साथ भेजे गये फॉर्मेट के अनुरूप ही बैठक की कार्यवाही तैयार कर अनुमोदन हेतु भेजा जाये. जिन विश्वविद्यालयों द्वारा वर्ष 2024 में सम्पन्न बैठक की कार्यवाही पूर्व से ही अनुमोदन हेतु भेजा गया है, उन मामलों में भी नये सिरे से संलग्न प्रपत्र के अनुरूप ही तैयार कर प्रस्ताव भेजेंगे.

कुलपति पर अपना आखिरी सीनेट बैठक आयोजन की जिम्मेदारी

नियमानुसार एमयू में सीनेट की बैठक वित्तीय वर्ष आरंभ होने के पूर्व ही फरवरी या मार्च माह में होनी थी. लेकिन नये वित्तीय वर्ष आरंभ होने के दो माह बाद भी अबतक छठा सीनेट बैठक आयोजित नहीं कर पाया है. ऐसे में जब इसी साल अगस्त माह में कुलपति प्रो. श्यामा राय का कार्यकाल समाप्त होना है तो अब खुद कुलपति पर अपने छठे सीनेट बैठक के आयोजन की जिम्मेदारी बढ़ गयी है. हलांकि शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों के सीनेट चुनाव से पहले सीनेट बैठक न होने की मंशा कुलपति के लिये छठा सीनेट बैठक अपने कार्यकाल में ही पूरा करना चुनौती भरा होना है. क्योंकि 4 जून के बाद एमयू में शिक्षक प्रमोशन और अनुकंपा पर नियुक्ति के अतिरिक्त पूर्व में हुये शिक्षकेतर कर्मचारियों के प्रमोशन की मांग काफी गरमाने वाली है.

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