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श्रावण हरियाली उत्सव हमारी पारंपरिक व सांस्कृतिक विरासत की देन

Updated at : 29 Jul 2025 12:05 AM (IST)
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श्रावण हरियाली उत्सव हमारी पारंपरिक व सांस्कृतिक विरासत की देन

श्रावण हरियाली उत्सव हमारी पारंपरिक व सांस्कृतिक विरासत की देन

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मुंगेर. श्रावण हरियाली उत्सव हमारी पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत की देन है. यह उत्सव प्रकृति की सुंदरता और उसके महत्व को दर्शाता है. जिससे लोगों में प्रकृति के प्रति आस्था और संरक्षण का भाव जागृत हो सके. ये बातें सरस्वती विद्या मंदिर में कक्षा अरुण, उदय और प्रभात के बच्चों द्वारा मनाये गए श्रावण हरियाली उत्सव कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्य संजय कुमार सिंह ने कही. उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अपनी संस्कृति से अवगत कराना है. प्राथमिक खंड की प्रभारी प्रधानाचार्या सुजीता कुमारी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से श्रावण मास में कौन-कौन से पर्व मनाते है. उसके बारे में विद्यार्थियों को जानकारी मिलती है. इस अवसर पर बच्चों ने भक्ति भाव से कांवड़ लेकर शिव मंदिर जाकर पूजा की. इस दौरान सभी बच्चे गेरुआ वस्त्र पहनकर शिव भक्ति के रंग में रंगे थे. प्रधानाचार्य ने राधा-कृष्ण बने बच्चों का झूला भी झूलाया.आचार्या शिवांगी सिन्हा ने कजरी गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. मौके पर उपप्रधानाचार्य अमन कुमार सिंह, बालिका खंड की प्रभारी प्रधानाचार्या राखी सिन्हा, आचार्या कुमारी कृति, शैली, आरती कुमारी आदि मौजूद थी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMIT JHA

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