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नैक को लेकर विश्वविद्यालय व कॉलेजों की लापरवाही अब बढ़ायेगी विद्यार्थियों की परेशानी

Updated at : 14 Oct 2024 6:35 PM (IST)
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नैक को लेकर विश्वविद्यालय व कॉलेजों की लापरवाही अब बढ़ायेगी विद्यार्थियों की परेशानी

नैक को लेकर सालों से मुंगेर विश्वविद्यालय और उसके सभी अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों की लापरवाही अब विद्यार्थियों की परेशानी को भी बढ़ा दिया है, क्योंकि एक ओर जहां सरकार द्वारा बिना नैक वाले विश्वविद्यालय व कॉलेजों के लंबे समय से ग्रांट नहीं दिया गया है.

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यूजीसी बिना नैक वाले विश्वविद्यालय व कॉलेजों सहित उनके विद्यार्थियों की कई योजनाओं पर हुआ सख्त, प्रतिनिधि, मुंगेर. नैक को लेकर सालों से मुंगेर विश्वविद्यालय और उसके सभी अंगीभूत एवं संबद्ध कॉलेजों की लापरवाही अब विद्यार्थियों की परेशानी को भी बढ़ा दिया है, क्योंकि एक ओर जहां सरकार द्वारा बिना नैक वाले विश्वविद्यालय व कॉलेजों के लंबे समय से ग्रांट नहीं दिया गया है. वहीं अब सरकार और यूजीसी बिना नैक वाले विश्वविद्यालय व कॉलेजों के विद्यार्थियों के स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पर भी रोक लगाने की तैयारी कर रहा है.

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना पर संकट

बता दें कि विश्वविद्यालय व कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिये स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना चलायी जाती है. जिसमें विद्यार्थियों को उनके किसी एक कोर्स के लिये 4 लाख तक का लोन दिया जाता है. इसमें कोर्स पूरा होने के एक साल बाद केवल 1 प्रतिशत ब्याज पर ही लोन की रकम विद्यार्थियों को देनी होती है. इसके लिये उक्त विश्वविद्यालय या कॉलेज से विद्यार्थियों को बोनाफाइड बनाकर आवेदन करना होता है, लेकिन अब यूजीसी और सरकार बिना नैक ग्रेडिंग वाले विश्वविद्यालय व कॉलेजों के विद्यार्थियों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ नहीं दिये जाने की तैयारी कर रहा है. ऐसे में सबसे बड़ा संकट बीएड, पीजी या पीएचडी जैसे कोर्स के लिये योजना का लाभ लेने वाले विद्यार्थियों के लिये होगी.

एमयू के केवल एक कॉलेज के पास है नैक का सी-ग्रेडिंग

एमयू के 33 अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों में वर्तमान में केवल एक कॉलेज कोशी कॉलेज, खगड़िया के पास ही नैक का सी-ग्रेडिंग है. ऐसे में एमयू के पीजी व पीएचडी विभागों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों सहित एमयू के सभी कॉलेजों के विद्यार्थियों पर अब संकट आ गया है. जबकि नैक ग्रेडिंग नहीं होने के कारण वैसे ही कॉलेजों को सरकार से सालों से एक रुपये तक ग्रांट के रूप में नहीं मिल पाया है.

कॉलेजों की लापरवाही बढ़ा रही परेशानी

एमयू के कॉलेज आरंभ से ही विश्वविद्यालय के आदेशों की अवहेलना में सबसे आगे रहे हैं. जबकि नैक को लेकर विश्वविद्यालय के आदेशों की अवहेलना अब खुद विश्वविद्यालय के साथ कॉलेजों और विद्यार्थियों की परेशानी को बढ़ायेगा. बता दें कि नैक ग्रेडिंग को लेकर 30 जून तक आवेदन करने का समय था, जिसमें एमयू द्वारा कई बार अपने कॉलेजों को नैक के लिये आवेदन करने का निर्देश दिया गया, लेकिन निर्धारित तिथि तक एमयू के केवल एक कॉलेज बीएन कॉलेज, बड़हिया द्वारा ही नैक को लेकर आवेदन किया गया. जिसके लिये कॉलेज में दिसंबर माह में पीयर टीम आ सकती है. जबकि शेष कॉलेजों को अब आवेदन करने के लिये जनवरी 2025 तक का इंतजार करना होगा, क्योंकि सरकार द्वारा नैक को लेकर आवेदन करने वाले पोर्टल को दिसंबर 2024 तक के लिये बंद कर दिया गया है. हद तो यह है कि यह हाल तब है, जब खुद कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी द्वारा नैक को लेकर समीक्षा बैठक करते हुए कॉलेजों को सख्त निर्देश दिया गया था.

कहते हैं डिप्टी रजिस्ट्रार

एमयू के डिप्टी रजिस्ट्रार सह नैक के नोडल अधिकारी डॉ अंशु कुमार राय ने बताया कि कुलपति द्वारा नैक की तैयारी पूरी करने का निर्देश कॉलेजों को दिया गया है. हालांकि, विश्वविद्यालय के पास न तो अपनी जमीन है और न ही पदों की स्वीकृति ऐसे में विश्वविद्यालय के लिये नैक ग्रेडिंग हासिल करना मुश्किल है, लेकिन कॉलेजों के लिये नैक ग्रेडिंग की तैयारी की जा रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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