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सदर अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से मरीजों को परेशानी

Updated at : 29 Jul 2025 12:02 AM (IST)
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सदर अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से मरीजों को परेशानी

सदर अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से मरीजों को परेशानी

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मुंगेर. मुंगेर सदर अस्पताल में पिछले दो वर्षों में भले ही स्वास्थ्य के आधारभूत संरचनाओं का व्यापक विस्तार हुआ हो, बावजूद यहां परिचारिकाओं व स्वास्थ्यकर्मियों की कमी अस्पताल प्रबंधन के साथ मरीजों के लिये परेशानी बढ़ा रहा है. हाल यह है कि सबसे अधिक दवाब वाले पुरूष, महिला व इमरजेंसी वार्ड में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी अस्पताल प्रबंधन के लिये बड़ी मुसीबत है. हाल यह है कि सदर अस्पताल में लगभग 15 वार्डों के लिये स्वीकृत कुल 50 परिचारिकाओं के पद पर वर्तमान में मात्र 33 परिचारिकाएं ही कार्यरत है. जबकि ड्रेस, फार्मासिस्ट, प्रयोगशाला प्रावैधिकी, प्रयोगशाला सहायक, चतुर्थवर्गीय कर्मी की कमी लंबे समय से अस्पताल प्रबंधन के लिये मुसीबत है.

14 वार्डों के लिये जरूरी 100 परिचारिकाएं, कार्यरत मात्र 33

सदर अस्पताल में लगभग 14 वार्डों का संचालन होता है. जिसमें पुरूष मेडिकल, पुरूष सर्जिकल, महिला, आईसीयू, एनआरसी, एनसीडी, पीकू, एसएनसीयू, एमसीएच, प्रसव केंद्र, ओपीडी, ओटी, टीकाकरण, रक्तअधिकोष शामिल है. जहां तीन शिफ्ट में परिचारिकाओं की ड्यूटी लगायी जाती है. इसमें भी अस्पताल वैसे स्वीकृत तो 100 बेड का है, लेकिन मरीजों की संख्या को देखते हुये यहां कुल बेडों की संख्या लगभग 130 है. जहां प्रतिदिन दर्जनों मरीज इलाज के लिये भर्ती है. हलांकि अस्पताल के इन 14 वार्डों के लिये जरूरत को 100 से अधिक परिचारिकाओं की है, लेकिन यहां परिचारिकाओं का स्वीकृत पद मात्र 50 ही है. हद तो यह है कि इसमें भी वर्तमान में अस्पताल के 14 वार्डों की जिम्मेदारी संभालने के लिये मात्र 33 परिचारिकाएं ही कार्यरत है. जिसके कारण सुबह के शिफ्ट के बाद दोपहर और रात के शिफ्ट की जिम्मेदारी मात्र एक परिचारिका के भरोसे होता है. जिससे न केवल खुद परिचारिकाएं दवाब झेल रही है, बल्कि मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

पुरूष, महिला व इमरजेंसी वार्ड की हालत बुरी

वैसे तो अस्पताल के लगभग सभी वार्डों में परिचारिकाओं की कमी है, लेकिन इसमें सबसे बुरी हालत पुरूष, महिला व इमरजेंसी वार्ड की है. हाल यह है कि पुरूष मेडिकल और सर्जिकल सहित कैदी वार्ड की जिम्मेदारी भी दोपहर और रात के शिफ्ट में केवल एक परिचारिका के कंधे पर होती है. जबकि आईसीयू जैसे महत्वपूर्ण वार्ड में भी कई शिफ्ट मात्र एक परिचारिका के भरोसे ही चलता है. उसमें भी यदि कोई परिचारिका अवकाश पर हो तो मुसीबत और अधिक बढ़ जाती है. इसके अतिरिक्त महिला वार्ड के परिचारिकाओं के कंधे पर महिला वार्ड के अतिरिक्त परिवार नियोजन वार्ड, बर्न वार्ड की जिम्मेदारी भी होती है. सबसे बुरा हाल तो इमरजेंसी वार्ड का है. जहां पूरे दिन अतिगंभीर, सड़क दुर्घटना में घायल आदि मरीज आते हैं. जहां कई बार परिचारिकाओं की कमी के कारण हंगामें की स्थिति बन जाती है.

ड्रेसर व फॉर्मासिस्ट की भी है वर्षों से कमी

ऐसा नहीं है कि अस्पताल प्रबंधन या मरीजों के लिये केवल परिचारिकाओं की कमी से सबसे बड़ी मुसीबत है. हाल यह है कि अस्पताल में सालों से ड्रेसर, फॉर्मासिस्ट, प्रयोगशाला प्रावैद्यिकी, प्रयोगशाला सहायक आदि की भी कमी है. हाल यह है कि अस्पताल में ड्रेसर के कुल स्वीकृत 6 पद पूरी तरह रिक्त हैं. जबकि फॉर्मासिस्ट के कुल स्वीकृत 5 पद पर मात्र एक फॉर्मासिस्ट कार्यरत है. वहीं प्रयोगशाला प्रावैधिकी के कुल स्वीकृत 5 पद पर 3 तथा प्रयोगशाला सहायक के कुल स्वीकृत 3 पद पूरी तरह रिक्त हैं. इतना ही नहीं अस्पताल में सालों से चतुर्थवर्गी कर्मी व वार्ड ब्यॉय की भी कमी है. जिसके कारण कई बार मरीजों को एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाने के लिये अपने ही परिजनों के भरोसे रहना पड़ता है या अस्पताल में कार्य करने वाले सफाईकर्मियों को कुछ पैसे देकर मदद लेनी पड़ती है. अब ऐसे में मरीजों के लिये मुसीबत और अधिक बढ़ जाती है.

कहते हैं सिविल सर्जन

सिविल सर्जन डा. रामप्रवेश प्रसाद ने बताया कि विभाग द्वारा सभी परिचारिकाओं की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी गयी है. जिसके कारण परिचारिकाओं की कमी है. इसके अतिरिक्त अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भी कमी है. जिसके लिये विभाग को पहले ही अवगत करा दिया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMIT JHA

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By AMIT JHA

AMIT JHA is a contributor at Prabhat Khabar.

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