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झूलनोत्सव के अंतिम दिन भक्ति-संगीत की बही बयार

Updated at : 10 Aug 2025 12:45 AM (IST)
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झूलनोत्सव के अंतिम दिन भक्ति-संगीत की बही बयार

झूलनोत्सव के अंतिम दिन भक्ति-संगीत की बही बयार

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तारापुर. सावन पूर्णिमा शनिवार को झूला उत्सव का अंतिम दिन रहा. इस दौरान भक्तों ने ठाकुरबाड़ियों में राधा-कृष्ण की आराधना की और भक्ति भजन पेशकर वातावरण को खुशनुमा बनाया. नगर पंचायत के राधा गोविंद ठाकुरवाड़ी, मोहनगंज ठाकुरवाड़ी व धौनी स्थित ठाकुरवाड़ी में वर्षों से सावन के महीने में झूला महोत्सव की परंपरा चली आ रही है. इस वर्ष भी झूला महोत्सव विधिविधान के साथ शुरू हुआ और सावन की पूर्णिमा तक चलता रहा. इस दौरान राधा-कृष्ण को श्रृंगार कराकर झूला झुलाया गया और भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा. मंदिर के ओमप्रकाश चौधरी, जयप्रकाश चौधरी, रौशन उपाध्याय, गोलू चौधरी ने बताया हर वर्ष सावन के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से भगवान को झूला झुलाने की परंपरा है. यह प्रथा वर्षों से चली आ रही है. इस समय में मानसून बहुत चिपचिपा होता है और ठंडी बारिश के बावजूद तापमान बहुत गर्म होता है. इस समय सुख की बात यह है कि ठंडी हवा का झोंका मिल जाए, क्योंकि हवा बारिश की नमी से भरी होती है. इसलिए भक्त राधा और कृष्ण की प्रसन्नता और संतुष्टि के लिए उन्हें झूले पर बिठाते हैं, जो अपने आप हवा का प्रवाह पैदा करते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAVIKANT SINGH

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