मुंगेर में ऑनलाइन दवा कारोबार के विरोध में बंद रहीं 900 दुकानें, मरीजों को हुई परेशानी
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 20 May 2026 10:37 AM
Munger Medical Store Strike
Munger Medical Store Strike: मुंगेर में ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ मेडिकल स्टोर बंद, जरूरी दवाओं के लिए भटकते रहे मरीज
Munger Medical Store Strike: मुंगेर से वीरेंद्र कुमार सिंह की रिपोर्ट — ऑनलाइन दवा कारोबार और दवाओं पर भारी छूट के विरोध में बुधवार को मुंगेर जिले की लगभग 900 थोक और खुदरा मेडिकल दुकानें बंद रहीं. मुंगेर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर राष्ट्रीय हड़ताल का व्यापक असर जिलेभर में देखने को मिला. मेडिकल स्टोर बंद रहने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को जरूरी दवाओं के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
सुबह से दवा बाजारों में पसरा रहा सन्नाटा
बुधवार सुबह से ही मुंगेर शहर के प्रमुख दवा बाजार पूरी तरह बंद नजर आए. पूरबसराय, बेकापुर, बड़ी बाजार, जमालपुर, हवेली खड़गपुर, तारापुर और असरगंज समेत कई इलाकों में मेडिकल स्टोर नहीं खुले.
आमतौर पर भीड़भाड़ रहने वाले दवा बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा. कई मरीज और उनके परिजन जरूरी दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान तक भटकते दिखाई दिए. खासकर बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अधिक परेशानी उठानी पड़ी.
ऑनलाइन दवा बिक्री पर जताया विरोध
मुंगेर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला सचिव अभिषेक कुमार बॉबी ने कहा कि ऑनलाइन दवा कंपनियों की वजह से छोटे और मध्यम स्तर के दवा व्यवसायियों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन कंपनियां भारी छूट देकर बाजार व्यवस्था को बिगाड़ रही हैं. इससे पारंपरिक दवा कारोबार कमजोर हो रहा है और छोटे दुकानदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.
मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी उठाए सवाल
दवा व्यवसायियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री में कई बार बिना उचित जांच के दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
व्यवसायियों का कहना है कि दवा एक संवेदनशील विषय है और इसकी बिक्री पूरी तरह नियंत्रित व्यवस्था के तहत होनी चाहिए. उन्होंने सरकार से ऑनलाइन दवा कारोबार को लेकर सख्त नियम लागू करने की मांग की.
सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इसी कारण देशव्यापी हड़ताल का फैसला लिया गया.
दवा कारोबारियों ने चेतावनी दी कि यदि ऑनलाइन दवा बिक्री पर नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में छोटे दुकानदारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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