मुंगेर विवि : आठ साल में मिले तीन कुलपति व 11 कुलसचिव, व्यवस्था फिर भी बदहाल

Updated at : 18 Mar 2026 6:56 PM (IST)
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मुंगेर विवि : आठ साल में मिले तीन कुलपति व 11 कुलसचिव, व्यवस्था फिर भी बदहाल

आठ सालों में विकास के आठ कदम नहीं चल पाया विवि

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मुंगेर. मुंगेर विश्वविद्यालय ने भले ही अपने स्थापना के आठ सालों में विकास के आठ कदम नहीं चल पाया हो, लेकिन इन आठ सालों में एमयू के कुलपति और कुलसचिव की सूची काफी लंबी हो गयी है, क्योंकि अब यहां तीन कुलपति आ चुके हैं. वहीं 11 कुलसचिव यहां कार्य कर चुके हैं. इसके बावजूद अबतक विश्वविद्यालय की व्यवस्था पूरी तरह बदहाल है.

अबतक तीन स्थायी व दो प्रभारी कुलपति

एमयू की स्थापना 18 मार्च 2018 को हुई है. इसके सबसे पहले कुलपति प्रो रणजीत कुमार वर्मा थे, जिनका कार्यकाल 2021 में समाप्त हुआ. इसके बाद टीएमबीयू भागलपुर की तत्कालीन कुलपति प्रो नीलिमा गुप्ता एमयू की प्रभारी कुलपति बनीं. वही साल 2021 में दूसरे कुलपति के रूप में प्रो श्यामा राय ने योगदान दिया. उनका कार्यकाल 2024 में समाप्त हुआ. इसके बाद एलएमएनयू, दरभंगा के डॉ संजय कुमार चौधरी को एमयू का अतिरिक्त प्रभार मिला. फिर साल 2025 में वर्तमान कुलपति प्रो संजय कुमार आये.

अबतक एमयू में आ चुके हैं 11 कुलसचिव

एमयू की स्थापना के भले ही आठ साल हो गये हैं, पर इन आठ सालों में ही यहां 11 कुलसचिव आ चुके हैं. बता दें कि साल 2018 में एमयू के पहले कुलसचिव कर्नल प्रवीरकांत झा बने थे. जो उसी साल इस्तीफा देकर चले गये. उनके बाद टीएमबीयू के कुलसचिव कर्नल अरुण कुमार सिंह प्रभार में रहे. उनके बाद कुलसचिव के रूप में कर्नल विजय कुमार ठाकुर साल 2019 में आये. हालांकि साल 2022 में उनकी जगह राजभवन की ओर से डॉ सत्येंद्र सिंह को भेजा गया. साल 2022 में ही राजभवन द्वारा उनकी जगह डॉ शिवरंजन चर्तुवेदी को एमयू का कुलसचिव बनाया गया, लेकिन मात्र चार माह बाद ही दोबारा राजभवन द्वारा उनकी जगह कुलसचिव के रूप में डॉ डीके सिंह को बनाया गया. उनके बाद कुलसचिव के रूप में दोबारा कर्नल विजय कुमार ठाकुर साल 2023 में आये. साल 2025 में कुलसचिव के रूप में प्रो घनश्याम राय ने योगदान दिया.

विवि में नामांकित लगभग 1.60 विद्यार्थियों के शिक्षा की जिम्मेदारी मात्र 276 शिक्षकों पर

एमयू के आठ साल के स्थापना काल में भले ही अधिकारियों की सूची लंबी हो, लेकिन एमयू में लंबित कार्यों की सूची उससे भी बड़ी है. एक ओर जहां आठ सालों में एमयू के कॉलेजों की आधारभूत संरचनाएं, कक्षा, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी की स्थिति पूरी तरह जर्जर है, जबकि 18 अंगीभूत कॉलेज और 20 पीजी विभागों में शिक्षकों की कमी का अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें नामांकित लगभग 1.60 विद्यार्थियों के शिक्षा की जिम्मेदारी मात्र 276 शिक्षकों पर ही है. जबकि कक्षा संचालन और लंबित सत्रों की सूची एमयू में लगातार बढ़ती जा रही है. हद तो यह है कि अब परीक्षा परिणाम भी एमयू में लगभग 5 से 6 माह के अंतराल पर जारी हो रहे हैं. इसका खामियाजा विद्यार्थी उठा रहे हैं.

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