8th Pay Commission पर रेलवे बॉडी की बड़ी मांग, अलाउंस-पेंशन शामिल करने की अपील

रेलवे संगठन ने 8th Pay Commission को भेजे सुझाव (फोटो-Canva)
8th Pay Commission: Indian Railways Technical Supervisors Association ने 8वें वेतन आयोग से अलाउंस, पेंशन और कर्मचारी वर्गीकरण समेत कई मुद्दे जोड़ने की मांग की, ताकि सभी कर्मचारियों की समस्याएं सही तरीके से शामिल हो सकें.
8th Pay Commission: केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. जहां एक तरफ आयोग ने अपनी प्रश्नावली (Questionnaire) का जवाब देने की समय-सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दी है, वहीं रेलवे के तकनीकी कर्मचारियों के संगठन (IRTSA) ने इस पूरी प्रक्रिया पर कुछ गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
संगठन का मानना है कि आयोग के मौजूदा सवाल अधूरे हैं और इसमें पेंशन, भत्तों और प्रमोशन जैसे बुनियादी मुद्दों को सही जगह नहीं मिली है. आइए विस्तार से समझते हैं कि रेलवे कर्मचारियों की वे कौन सी मांगें हैं, जो आपके वेतन और भविष्य पर सीधा असर डाल सकती हैं.
क्या है पूरा मामला ?
आठवें वेतन आयोग ने सरकारी कर्मचारियों से उनकी राय जानने के लिए 18 सवालों की एक लिस्ट (Questionnaire) जारी की है. इसकी आखिरी तारीख पहले 16 मार्च थी, जिसे बढ़ाकर अब 31 मार्च 2026 कर दिया गया है. लेकिन रेलवे संगठन (IRTSA) का कहना है कि आयोग के ये सवाल अधूरे हैं और इसमें कई जरूरी चीजें शामिल नहीं की गई हैं. उन्होंने आयोग की अध्यक्ष रंजना देसाई को पत्र लिखकर कुछ बदलावों की मांग की है.
कर्मचारियों की 5 प्रमुख मांगें
- पेंशन का मुद्दा शामिल हो: संगठन का कहना है कि आयोग के सवालों में ‘पेंशन’ और ‘फैमिली पेंशन’ का जिक्र तक नहीं है. रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों पर अलग से बात होनी चाहिए.
- पदों का नया बंटवारा (Classification): अभी कर्मचारियों को ग्रुप A, B और C में बांटा गया है. रेलवे संगठन चाहता है कि बदलती तकनीक और जिम्मेदारियों को देखते हुए इस पुराने ढांचे को बदला जाए और पदों का नया वर्गीकरण हो.
- भत्तों (Allowances) का दायरा बढ़े: सातवें वेतन आयोग में करीब 196 तरह के भत्ते थे, लेकिन अभी आयोग सिर्फ 12 ग्रुप्स पर बात कर रहा है. मांग है कि हर कैटेगरी के हिसाब से सभी भत्तों पर चर्चा हो.
- प्रमोशन पर फोकस: अभी सिर्फ MACP (समय के साथ मिलने वाली तरक्की) की बात हो रही है, जबकि कर्मचारियों का कहना है कि फोकस ‘फंक्शनल प्रमोशन’ (काम और पद के आधार पर तरक्की) पर होना चाहिए.
- ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन का विकल्प: अभी सिर्फ ऑनलाइन जवाब मांगे जा रहे हैं. संगठन चाहता है कि फिजिकल कॉपी (कागज पर लिखकर) जमा करने की सुविधा भी मिले, क्योंकि 3500 शब्दों की लिमिट अपनी बात पूरी तरह कहने के लिए कम है.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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