सिख दंगा के 32 वर्ष बाद पीड़ित को पुनर्वास पैकेज
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 May 2016 6:01 AM
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मुंगेर : 1984 के सिख विरोधी दंगे में मारे गये जमालपुर शहर के सदर बाजार निवासी दलजीत सिंह के पीड़ित परिवार को 32 वर्ष बाद सरकार ने पुनर्वास पैकेज देने का निर्देश जारी किया है. सरकार का यह निर्देश तब जारी हुआ है जब दलजीत सिंह की पत्नी राज कौर की भी मौत हो चुकी […]
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मुंगेर : 1984 के सिख विरोधी दंगे में मारे गये जमालपुर शहर के सदर बाजार निवासी दलजीत सिंह के पीड़ित परिवार को 32 वर्ष बाद सरकार ने पुनर्वास पैकेज देने का निर्देश जारी किया है. सरकार का यह निर्देश तब जारी हुआ है जब दलजीत सिंह की पत्नी राज कौर की भी मौत हो चुकी है और उसके दो बच्चे जमालपुर छोड़ कर कानपुर में शिफ्ट हो गये हैं.
31 अक्तूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की उनके अंगरक्षकों ने ही गोली मार कर हत्या कर दी थी. गोली मारने वाले अंगरक्षक सिख समुदाय के थे. इसलिए घटना के बाद पूरे देश में सिख विरोधी दंगा भड़क उठा था. इस दंगे की आंच मुंगेर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी फैल गयी थी. इसके तहत कुछ कट्टरपंथियों ने
सिख दंगा के…
जहां कई स्थानों पर लूटपाट किया था. वहीं जमालपुर शहर के सदर बाजार निवासी 45 वर्षीय युवक दलजीत सिंह की दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी थी. इस मामले में 32 साल बाद बिहार सरकार की गृह विभाग द्वारा पीड़ित परिवार को पुनर्वास पैकेज के अंतर्गत अतिरिक्त सहायता राशि के रूप में 5 लाख देने की स्वीकृति प्रदान की है और यह राशि मुंगेर के जिलाधिकारी को आवंटित किया गया है.
गृह विभाग विशेष शाखा के विशेष सचिव जीतेंद्र कुमार ने इस संदर्भ में अपने ज्ञापांक के माध्यम से जिलाधिकारी मुंगेर को राशि भुगतान का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा है कि 5 लाख की राशि दलजीत सिंह के निकटतम आश्रित की समुचित पहचान कर किया जाय. इस राशि का भुगतान एकाउंट पेयी चेक द्वारा किया जायेगा. साथ ही 15 दिनों के अंदर इसके उपयोगिता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है
यूं तो दलजीत सिंह का परिवार अब कानपुर में रहता है. किंतु इस संदर्भ में दलजीत सिंह के मामा एवं श्री गुरु सिंह सभा केशोपुर जमालपुर के पूर्व उपाध्यक्ष सरदार लाभ सिंह बताते हैं कि वह घटना अत्यंत ही दुखद थी. उसका भांजा दलजीत की तबीयत खराब थी और वह दवा लेने घर से निकला था. जहां गुरुद्वारा चौक सीताराम मंदिर के पास एक युवक ने गोली मार कर उसकी हत्या कर दी. वे बताते हैं कि उस समय दलजीत महज 45 वर्ष का था और उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे थे.
घटना के बाद पूरा परिवार ही बिखर गया. भारत सरकार ने बाद में सिख विरोधी दंगे के पीड़ित परिवार के घाव पर मरहम लगाने का काम किया और इसके तहत 3.50 लाख की मुआवजा राशि दी गयी और विधवा को पेंशन का प्रावधान किया गया. लेकिन इस घटना के बाद दलजीत का पूरा परिवार कानपुर शिफ्ट कर गया.
गत वर्ष ही उसकी पत्नी राज कौर की भी मौत हो गयी. उसके दोनों पुत्र अमरपाल सिंह व जसपाल सिंह कानपुर में ही रहने लगे. जबकि पुत्री जीतेंद्र कौर की शादी पटनासाहिब में हुई है. गृह विभाग के निर्देश के बाद अब मुंगेर जिला प्रशासन ने दलजीत सिंह के पुत्रों की खोज प्रारंभ की है, जिसे पुनर्वास पैकेज के तहत राहत राशि उपलब्ध करानी है.
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