क्षत्रिय को युद्ध से विमुख हो जाना मृत्यु से खराब : चैतन्य

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बरियारपुर : ईटहरी गांव में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को वृंदावन से पधारे साध्वी चंचला चैतन्य गौड़ ने कहा कि जिनके प्राण नहीं गये हैं और जिनके चले गये हैं इन दोनों के लिए पंडितजन शोक नहीं करते. जैसे जीवात्मा का इस मानव शरीर में बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती […]

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बरियारपुर : ईटहरी गांव में आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को वृंदावन से पधारे साध्वी चंचला चैतन्य गौड़ ने कहा कि जिनके प्राण नहीं गये हैं और जिनके चले गये हैं इन दोनों के लिए पंडितजन शोक नहीं करते. जैसे जीवात्मा का इस मानव शरीर में बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है वैसे ही अन्य शरीरों की प्राप्ति होती है.

इस विषय में धीर पुरुष मोहित नहीं होते. उन्होंने कहा कि कुंती पुत्र अर्जुन सर्दी-गर्मी, सुख-दुख को देने वाला इंद्रीय और विषयों का संयोग तो विनाशी और अनित्य है. अत: तुम जो सुख-दुख को समान समझने वाले जिस धीर पुरुष को ये इंद्रियां और विषयों के संयोग व्याकुल नहीं करते वह मोक्ष के योग्य होते हैं. यह आत्मा न किसी काल में मरता है और न जन्म लेता है.

यह सनातन पुरातन है और शरीर के मारे जाने पर भी नहीं मरता. कुरुक्षेत्र के भीषण प्रांगण में जब अर्जुन मोहभिभूत हो गये और भगवान श्रीकृष्ण से कहा कि मैं युद्ध नहीं करूंगा. तब कृष्ण ने कहा कि यह कायरता का दोष तो न तुम्हारे माता कुल का है और न ही पितृ कुल का. तुम्हारे वंश में युद्ध से पारंग मूर्ख तो कोई नहीं हुए. क्योंकि क्षत्रिय को युद्ध से विमुख हो जाना मृत्यु से खराब है. मौके पर अध्यक्ष गीता प्रसाद सिंह, सचिव सुधीर कुमार विद्यार्थी, डॉ अमोद सिंह, पंकज कुमार मुन्ना, उमाशंकर सिंह, कोमल कुमारी उपस्थित थे.

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