स्वास्थ्य सुविधा के टॉप टेन में मुंगेर नहीं

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मुंगेर सदर अस्पताल में बुनियादी सुविधा भी नहीं, बेहतर है खगड़िया का सदर अस्पताल मुंगेर : मुंगेर को भले ही प्रमंडल का दर्जा प्राप्त हो. किंतु यहां का सदर अस्पताल स्वास्थ्य सुविधा के मामले में राज्य के टॉप टेन जिले में शामिल नहीं है. हाल यह है कि अस्पताल में कई बुनियादी सुविधाओं तक का […]

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मुंगेर सदर अस्पताल में बुनियादी सुविधा भी नहीं, बेहतर है खगड़िया का सदर अस्पताल
मुंगेर : मुंगेर को भले ही प्रमंडल का दर्जा प्राप्त हो. किंतु यहां का सदर अस्पताल स्वास्थ्य सुविधा के मामले में राज्य के टॉप टेन जिले में शामिल नहीं है. हाल यह है कि अस्पताल में कई बुनियादी सुविधाओं तक का टोटा है. सही मायने में यदि कहा जाय तो मुंगेर का सदर अस्पताल महज एक रेफर अस्पताल बन कर रह गया है. जबकि मुंगेर प्रमंडल का खगडि़या राज्य में दूसरे व बेगूसराय चौथे स्थान पर है.
उद्घाटन के बाद भी बंद पड़ा है आइसीयू
सदर अस्पताल में एक वर्ष पूर्व जिलाधिकारी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने आइसीयू का उद्घाटन किया था. साथ ही उन्होंने कहा था कि अब जिले के गंभीर मरीजों का इलाज यहां संभव हो पायेगा. किंतु अब तक आइसीयू में एक भी मरीज को भरती नहीं किया गया है. हाल यह है कि यहां का आइसीयू महज हाथी का दांत बन कर रह गया है.
बंद है पोषण पुनर्वास केंद्र
सदर अस्पताल के महिला वार्ड स्थित प्रथम तल पर पोषण पुनर्वास केंद्र स्थापित है. यहां जिले के कुपोषित बच्चों का इलाज किया जाता था. किंतु नवंबर 2014 से यह केंद्र बंद पड़ा हुआ है. वैसे जिलाधिकारी अमरेंद्र प्रसाद सिंह ने सिविल सर्जन व अस्पताल उपाधीक्षक को कई बार पोषण पुनर्वास केंद्र को चालू करने का निर्देश दिया. बावजूद अबतक इसकी सेवा आरंभ नहीं हो पायी है.
नहीं हो रहा नि:शुल्क इसीजी
अस्पताल प्रबंधक कार्यालय भवन में ही नि:शुल्क ईसीजी की सेवा आरंभ की गयी थी. किंतु पिछले पांच महीने से यह सेवा भी बंद पड़ी हुई है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईसीजी के टेक्नीशियन ने नौकरी ही छोड़ दी है. जिसके बाद अब तक टेक्नीशियन के अभाव में ईसीजी सेवा बंद पड़ा हुआ है.
वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग ओपीडी नहीं
स्वास्थ्य विभाग द्वारा भले ही निर्देश दिया गया हो कि अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग ओपीडी व दवा वितरण काउंटर की व्यवस्था की जाये. अस्पताल में वरिष्ठ ओपीडी कक्ष तो बनाया गया. किंतु इसका संचालन नहीं हो पा रहा. जिसके कारण बुजुर्ग महिला व पुरुषों को जीओपीडी में ही इलाज करवाना पड़ता है. साथ ही दवा लेने के लिए भी जेनरल काउंटर पर ही लाइन लगनी पड़ती है.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि सदर अस्पताल में की मिलने वाली सुविधाओं में हुए अभाव के जिम्मेदार अस्पताल उपाधीक्षक है. अस्पताल में मेंटेनेंस के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सालाना पांच लाख रुपये दिये जाते हैं. अस्पताल उपाधीक्षक को व्यवस्थाओं में सुधार लाने का निर्देश पूर्व में भी दिया गया है.
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