गोविंद मेरो हैं गोपाल मेरो हैं श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो हैं...

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गोविंद मेरो हैं गोपाल मेरो हैं श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो हैं… फोटो संख्या : 1फोटो कैप्सन : झांकी प्रस्तुत करते बच्चे प्रतिनिधि, हवेली खड़गपुर नगर के मारवाड़ी टोला में चल रहे संत पथिक सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे संगीतमय श्रीमद् भावगत कथा ज्ञान सप्ताह के दौरान गुरुवार को भक्ति की रसधार […]

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गोविंद मेरो हैं गोपाल मेरो हैं श्री बांके बिहारी नंदलाल मेरो हैं… फोटो संख्या : 1फोटो कैप्सन : झांकी प्रस्तुत करते बच्चे प्रतिनिधि, हवेली खड़गपुर नगर के मारवाड़ी टोला में चल रहे संत पथिक सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे संगीतमय श्रीमद् भावगत कथा ज्ञान सप्ताह के दौरान गुरुवार को भक्ति की रसधार बही. दीक्षा कार्यक्रम के उपरांत हरिद्वार से पधारे कथावाचक सुबोधानंद जी ने कहा कि भागवत कथा का ज्ञान प्रत्येक मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा एवं मनुष्यकता का संदेश लाता है. उन्होंने भगवान कृष्ण को साक्षात आत्मा कहा और रुकमिनी को लक्ष्मी. इसलिए लक्ष्मी को नारायण की संज्ञा दी गयी है. कथा के दौरान संगीत मंडली के सदस्यों द्वारा गोविंद मेरो है गोपोल मेरो है और श्रीमन नारायण, नारायण-नारायण भजन से प्रशाल गुंजायमान होता रहा. कथावाचक सुबोधानंद जी ने श्रीकृष्ण और रुकमिनी विवाह का प्रसंग वितस्तारपूर्वक संगीत के माध्यम से सुनाया. उन्होंने कहा कि वास्तविक पिता वही है जो दूसरे के बच्चों के प्रति अपने बच्चों जैसा व्यवहार व देखभाल करें. उन्होंने श्रीकृष्ण एवं उद्धव जी से कहते हैं कि वास्तविक ध्यान प्रकट करने के लिए उधो मोहे बृज बिरत नाही. वहीं कृष्ण-रुकमिनी विवाह प्रसंग के पूर्व सुबोधानंद जी ने उद्धव जी गोपियों से कहा कि श्रीकृष्ण स्वयं साक्षात आत्मा है. उनका वास्तविक रूप चैतन्य है. कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और रुकमिनी विवाह की मनोरम झांकी भी प्रस्तुति की गयी. जिसे देख कर श्रद्धालु भक्ति के सागर में गोता लगाने को विवश हो गये. मुख्य यजमान राधे टिवड़ेवाल, महेंद्र साह, आयोजक सुरेश बाजोरिया, ब्रह्मदेव केसरी, आशीष बाजोरिया, दिनेश बाजोरिया, महेश बाजोरिया, विमल पोद्दार सहित सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु मौजूद थे.

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