प्रसव केंद्र में चिकत्सिक का काम करती है नर्स

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मुंगेर : सदर अस्पताल में यूं तो सोमवार से शनिवार तक अलग- अलग वार्डों में मरीजों के इलाज के लिए अलग- अलग चिकित्सक तैनात किये जाते हंै. किंतु रविवार को यहां मात्र एक ही चिकित्सक के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया जाता है. जिसके कारण चिकित्सकों का काम नर्सों को करना पड़ता है. चाहे कोई […]

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मुंगेर : सदर अस्पताल में यूं तो सोमवार से शनिवार तक अलग- अलग वार्डों में मरीजों के इलाज के लिए अलग- अलग चिकित्सक तैनात किये जाते हंै. किंतु रविवार को यहां मात्र एक ही चिकित्सक के भरोसे मरीजों को छोड़ दिया जाता है. जिसके कारण चिकित्सकों का काम नर्सों को करना पड़ता है.

चाहे कोई गंभीर मरीज ही क्यों न इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे.केस स्टडी- 1हवेली खड़गपुर प्रखंड के धपरी गांव निवासी धर्मराज यादव की पत्नी कंचन देवी को प्रसव के लिए रविवार को सदर अस्पताल में भरती कराया गया. भरती होने के छह घंटे बाद तक उसे देखने चिकित्सक नहीं पहुंचे. कंचन देवी ने बताया कि चिकित्सक तो एक बार भी नहीं आये,

किंतु नर्स ने उन्हें सूई लगा कर सलाइनिंग किया है.केस स्टडी- 2सुजावलपुर निवासी मो. परवेज की पत्नी आयशा परवीन को पिछले 2 दिसंबर को ही प्रसव केंद्र में भरती कराया गया है. उनके गर्भ का आठवां महीना चल रहा है. किंतु रक्तश्राव के कारण उसे प्रसव केंद्र में भरती कराया गया. भरती होने के पांच दिन बाद भी उनका रक्तश्राव बंद नहीं हो पाया है.

रविवार को आयशा ने बताया कि नर्स आती है सूइ व सलाइन लगा कर चली जाती है. आज चिकित्सक एक बार भी नहीं आये हैं. जिसे मैं अपनी परेशानी बता पाती.ड्यूटी पर मौजूद नहीं थे चिकित्सकप्रसव केंद्र में दिन के 1:30 बजे चिकित्सक मौजूद नहीं थे. इस संबंध में जब ड्यूटी पर तैनात नर्स खुशबू कुमारी से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि आज ड्यूटी रोस्टर पर आठ से दो के बीच किसी चिकित्सक का नाम अंकित नहीं किया गया है.

उन्होंने इस संबंध में अस्पताल उपाधीक्षक से बात की तो उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर डॉ शुभ्रा वर्मा से फोन पर सलाह ले लेना.नर्स के भरोसे होता है प्रसव कार्यसदर अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड व प्रसव वार्ड 24 घंटे निरंतर चलने वाले विभाग हैं. जहां कभी भी मरीज इलाज के लिए पहुंच सकते हैं. स्वास्थ्य विभाग के नियम व निर्देशों के अनुसार मरीजों के इलाज के लिए यहां 24 घंटे चिकित्सक का रहना भी अनिवार्य है.

किंतु अस्पताल प्रबंधन विभागीय निर्देश को ताक पर रख कर अपने मनोनुकूल विभिन्न वार्डों का संचालन करते हैं. जिसका नजारा रविवार को भलि- भांति देखा जा सकता है. रविवार को इमरजेंसी वार्ड में तो एक चिकित्सक को तैनात कर दिया जाता है. किंतु प्रसव वार्ड को नर्सों के भरोसे छोड़ दिया जाता है. जिसके कारण बिना चिकित्सक के सलाह के ही नर्स अपने मन से गर्भवती महिलाओं का इलाज करती है. साथ ही उनका प्रसव भी कराती है.

नर्स के भरोसे प्रसव के दौरान कई बार गर्भवती महिलाओं व नवजात की जानें तक जा चुकी है. कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षकअस्पताल उपाधीक्षक डॉ राकेश कुमार ने बताया कि रविवार को प्रसव केंद्र में सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक के लिए डॉ शुभ्रा वर्मा को ऑन कॉल ड्यूटी पर रखा गया है. साथ ही इमरजेंसी वार्ड में डॉ शशि शेखर को तैनात किया गया है, जो एमॉक ट्रेंड हैं. वे भी महिलाओं का इलाज कर सकते हैं.

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