किशनगंज स्टेशन पर ट्रेनों की रफ्तार थमी, 8 घंटे लेट पहुंचीं कई एक्सप्रेस ट्रेनें
किशनगंज स्टेशन
Kishanganj Railway Station: किशनगंज स्टेशन पर कामाख्या-पुरी समेत कई ट्रेनें घंटों लेट रहीं. यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.रविवार को एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण ट्रेनें घंटों की देरी से पहुंचीं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.
Kishanganj Railway Station: सीमांचल के प्रमुख रेलवे स्टेशन किशनगंज पर रविवार की सुबह यात्रियों के लिए परेशानी भरी रही. एक साथ कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों के घंटों विलंब से चलने के कारण स्टेशन पर अफरातफरी और बेचैनी का माहौल बना रहा. रात से ही यात्री स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते रहे, लेकिन देरी का सिलसिला सुबह तक जारी रहा.
सबसे अधिक प्रभावित कामाख्या-पुरी एक्सप्रेस रही, जो अपने निर्धारित समय से करीब आठ घंटे की देरी से चल रही थी. इसके अलावा ब्रह्मपुत्र मेल छह घंटे से अधिक, चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस लगभग पांच घंटे और कामाख्या एसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस चार घंटे से ज्यादा विलंब से परिचालित हुई. सिलचर एक्सप्रेस भी तीन घंटे से अधिक की देरी से किशनगंज स्टेशन पहुंची.
रात से स्टेशन पर जमे रहे यात्री
ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी के कारण रविवार सुबह स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर असामान्य भीड़ देखने को मिली. कई यात्री रात से ही अपने परिवार और सामान के साथ स्टेशन पर डटे रहे. बार-बार हो रही घोषणाओं और बदलते आगमन समय ने यात्रियों की परेशानी और बढ़ा दी.
यात्रियों ने बताया कि ट्रेनों के लगातार विलंबित होने से उनकी आगे की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं. कई लोगों की कनेक्टिंग ट्रेनें छूटने की आशंका बनी रही, जबकि कुछ यात्रियों को जरूरी काम के लिए तय समय पर गंतव्य तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
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रेलवे की समयपालन व्यवस्था पर उठे सवाल
पूर्वोत्तर भारत की लाइफलाइन माने जाने वाले इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर एक साथ कई ट्रेनों का घंटों विलंब से चलना रेलवे की समयपालन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है. हालांकि कुछ ट्रेनें अपने निर्धारित समय पर चलीं, लेकिन अधिकांश लंबी दूरी की ट्रेनों की देरी ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं.
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हर घोषणा के साथ जागती रही उम्मीद
किशनगंज स्टेशन पर हालात ऐसे रहे कि यात्रियों के बीच ट्रेनों से ज्यादा चर्चा उनकी देरी को लेकर होती रही. प्लेटफॉर्म पर हर नजर पटरियों की ओर टिकी थी और हर नई घोषणा के साथ यात्रियों की उम्मीदें फिर जाग उठती थीं. लेकिन देरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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