ठाकुरगंज: बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री की ऐतिहासिक शुरुआत, पहले ही दिन कातिबों की हड़ताल से पसरा सन्नाटा

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सुनसान रजिस्ट्री ऑफिस

बिहार में 17 अगस्त से जमीन निबंधन की पेपरलेस, डिजिटल व्यवस्था लागू हो गई है. हालांकि, किशनगंज के ठाकुरगंज में कातिबों की हड़ताल ने पहले दिन ही व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए. जानिए इस ऐतिहासिक शुरुआत और उसके पहले दिन की चुनौतियों के बारे में.

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बिहार में जमीन और संपत्ति के निबंधन की व्यवस्था सोमवार, 17 अगस्त से पूरी तरह डिजिटल दौर में प्रवेश कर गई. राज्य सरकार ने कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता खत्म करते हुए पारदर्शी और तेज प्रक्रिया के लिए पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू कर दी है. हालांकि, किशनगंज जिले के ठाकुरगंज निबंधन कार्यालय में इस व्यवस्था की शुरुआत विरोध और सन्नाटे के बीच हुई. नई व्यवस्था के विरोध में कातिबों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से पहले दिन एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी और कार्यालय में कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा.

गुलजार रहने वाले रजिस्ट्री परिसर में छाया रहा सन्नाटा

आम दिनों में ठाकुरगंज रजिस्ट्री कार्यालय परिसर में सुबह से ही जमीन के खरीदार, विक्रेता, कातिब, स्टांप वेंडर और दस्तावेज नवीस मौजूद रहते थे, जिससे वहां भारी चहल-पहल बनी रहती थी. सोमवार को नई व्यवस्था के पहले दिन नजारा बिल्कुल अलग रहा. कार्यालय परिसर की अधिकांश कुर्सियां खाली पड़ी रहीं और लोगों की आवाजाही न के बराबर रही. जो इक्का-दुक्का लोग पहुंचे भी, वे नई डिजिटल व्यवस्था की प्रक्रिया और कातिबों की भूमिका को लेकर जानकारी जुटाते और असमंजस में नजर आए.

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सुनसान रजिस्ट्री ऑफिस

डिजिटल प्रक्रिया बनाम पारंपरिक व्यवस्था का टकराव

सरकार द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य डीड तैयार करने, दस्तावेजों के सत्यापन और निबंधन शुल्क के भुगतान को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना है. इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को बढ़ावा मिलने से पारंपरिक रूप से हाथों से दस्तावेज तैयार करने वाले कातिबों के सामने अपनी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. इसी के विरोध में कातिबों ने हड़ताल का रास्ता चुना, जिससे पहले ही दिन निबंधन का कार्य पूरी तरह ठप हो गया.

कातिबों की हड़ताल बनी सबसे बड़ी चुनौती

पेपरलेस रजिस्ट्री लागू होने के साथ ही कातिबों का विरोध विभाग के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है. कातिबों का कहना है कि नई डिजिटल प्रणाली में उनकी भूमिका, कार्यशैली और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. उनका तर्क है कि जब तक इन व्यावहारिक बिंदुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय नहीं होते, तब तक व्यवस्था का सुचारू संचालन मुश्किल होगा.

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आपस में चर्चा करते कातिब

जमीन खरीदार और विक्रेता परेशान

पहले दिन कार्यालय पहुंचे लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि अब रजिस्ट्री की सामान्य प्रक्रिया कब शुरू होगी और दस्तावेज किस तरह तैयार होंगे. एक तरफ सरकार जहां पेपरलेस रजिस्ट्री को भविष्य का सुरक्षित और पारदर्शी कदम बता रही है, वहीं कातिबों की हड़ताल और तकनीकी बदलावों के बीच जमीन की खरीद-बिक्री कराने पहुंचे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.


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बच्छराज

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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