साइबर क्राइम : लूटे जा रहे बैंक उपभोक्ता, पुलिसिया कार्रवाई नगण्य

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साइबर क्राइम : लूटे जा रहे बैंक उपभोक्ता, पुलिसिया कार्रवाई नगण्य फर्जी बैंक अधिकारी बन कर लिया जाता है एटीएम कार्ड का नंबर व पिन कोड नेट मार्केटिंग के जरिये जालसाज दूसरे के खाते को रहे लूट प्रतिनिधि, मुंगेर जिले में लगातार साइबर क्राइम की घटनाएं घटित हो रही है. बैंक उपभोक्ता जानकारी के अभाव […]

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साइबर क्राइम : लूटे जा रहे बैंक उपभोक्ता, पुलिसिया कार्रवाई नगण्य फर्जी बैंक अधिकारी बन कर लिया जाता है एटीएम कार्ड का नंबर व पिन कोड नेट मार्केटिंग के जरिये जालसाज दूसरे के खाते को रहे लूट प्रतिनिधि, मुंगेर जिले में लगातार साइबर क्राइम की घटनाएं घटित हो रही है. बैंक उपभोक्ता जानकारी के अभाव में मेहनत की कमाई को पल भर में गंवा रहे हैं. मामले की जानकारी पुलिस में भी दी जाती है और बैंक अधिकारी को भी, लेकिन कार्रवाई नगण्य. बैंक यह कह कर पल्ला झाड़ लेती है कि आपने एटीएम का नंबर व पिन बताया क्यों. हम बोल रहे हैं बैंक अधिकारी… साइबर क्राइम करने वाले इतने एक्सपर्ट हो चुके हैं कि वह किसी नंबर से फोन कर कहता है कि मुंबई से बैंक अधिकारी बोल रहा हूं तो कभी बैंक का कस्टमर केयर बन कर बात करता है. आपका एटीएम कार्ड ब्लॉक कर दिया गया है, जिसके लिए आपको एटीएम के ऊपर अंकित 16 अंक का नंबर व पिन कोड बताना होगा. यदि उपभोक्ता होशियार है या जानकारी है तो मामला वहीं खत्म हो जाता है, लेकिन यदि उस फोन कॉल के झांसे में आ गये तो फिर खाते से राशि की निकासी हो जाती है. यह निकासी नेट मार्केटिंग के जरिये हो रहा है. जिसमें जालसाज दूसरे के एटीएम नंबर व पिन कोड के आधार पर महंगे समानों की खरीदारी व रीचार्ज तक कर लेते हैं. लड़कियां भी है शामिल इस गोरखधंधा में ज्यादातर लड़कियों को कस्टमर केयर व अधिकारी बनाकर इस्तेमाल किया जाता है. ताकि उनके आवाज पर लोग आसानी से आकर्षित हो सके. इतना ही नहीं जब लड़कियों से मामला नहीं संभलता है तो वह बैंक अधिकारी बनाकर किसी युवक को थमा देता है जो उसे समझा-बुझा कर उपभोक्ताओं से बैंकिंग संबंधी जानकारी प्राप्त करता है. कैसे होती है निकासी साइबर माफिया इतना सक्रिय है कि वह एटीएम नंबर व पिन तो जरूर पूछ लेता है लेकिन वह नकद राशि प्राप्त नहीं कर पाता है. इसके बदले में विभिन्न कंपनियों के वेबसाइट पर जाकर लैपटॉप, प्रिंटर, मोबाइल, रीचार्ज सहित विभिन्न प्रकार के शॉपिंग करता है. जिसमें वह उस एटीएम नंबर एवं पिन का उपयोग करता है, जिसकी जानकारी उपभोक्ताओं को खाता अपटूडेट कराने से पता चल जाता है. जिसमें यह भी स्पष्ट हो जाता है कि खरीदारी कहां हुई है. बढ़ती टेक्नोलॉजी परेशानी का कारण टेक्नोलॉजी की दुनिया में मनुष्य का कार्य जितना आसान और तेज हो रहा है कि इससे लोगों की परेशानी बढ़ रही है. रोज-रोज नये-नये टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है और लोग उसे अपनाकर अपने कीमती समय को व्यर्थ होने नहीं दे रहे हैं. लेकिन बढ़ते तकनीक ने लोगों को इस कदर परेशानी में डाल रहा है कि जिसका समस्या का समाधान होने वाला नहीं. चाहे वह धोखाधड़ी का मामला हो या एटीएम के माध्यम से राशि निकासी की. जागरूकता का है अभाव आमतौर पर बैंक द्वारा उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए न तो जागरूकता कार्यक्रम चलाती है और न ही समुचित जानकारी उपभोक्ता रखते हैं. इसके कारण उपभोक्ता ठगी के शिकार हो रहे हैं. बैंक केवल अपने बैंक परिसर में दो-चार स्लोगन लिख कर पोस्टर लगा रखी है और वही उसका जागरूकता कार्यक्रम है. केस स्टडी-1 शहर के शादीपुर निवासी संजय कुमार के खाते से साइबर माफियाओं ने किस्त दर किस्त 1 लाख 92 हजार 145 रुपये उड़ा लिये. उन्होंने बताया कि 29 अक्तूबर को उसके मोबाइल पर 8677078406 नंबर से फोन आया और कहा कि एसबीआइ एटीएम पटना का पदाधिकारी बोल रहा हूं. आपका एटीएम ब्लॉक है. एटीएम कार्ड रिलीज कराने के लिए आप किसी दूसरा एटीएम कार्ड का नंबर गारेंटर के तौर पर देना होगा. उसने बैंक अधिकारी समझ कर एटीएम नंबर व पिन कोड दे दिया, जिसके बाद साइबर माफियाओं ने उसके पश्चिम बंगाल के एसबीआइ के खाते से 1 लाख 92 हजार 145 रुपये तीन किस्त में राशि की निकासी कर ली. केस स्टडी-2जमालपुर जुबली बेल चौक स्थित महावीर मंदिर के पुजारी मनीष कुमार पांडेय को वर्ष 2014 में साइबर माफियाओं ने मोबाइल से जानकारी लेकर 70 हजार रुपये का चूना लगा दिया. उनका एटीएम केनरा बैंक मुंगेर का था. उसके मोबाइल संख्या 8877201364 से फोन कर कहा कि केवाइसी जांच के लिए मुंबई से बोल रहा हूं. इसलिए एटीएम के 16 डिजिट का नंबर बताना होगा. पुजारी ने कहा कि वह एटीएम का नंबर बताया कि फोन काट दिया गया. जब वह बैंक पहुंचा और शाखा प्रबंधक से बात की तो उसे पता चला कि उसके 70 हजार रुपये इ मार्केंटिग के जरिये निकाल लिये गये. बैंक द्वारा बताया गया कि उसके एकाउंट से पहली निकासी कर ली गयी. इस मामले में उसने पुलिस में भी मामला दर्ज कराया लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुआ. केस स्टडी-3 भागलपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व महासचिव विजय सिंह साइबर क्राइम का शिकार 11 अप्रैल 2015 को हुआ था. जिनके यूको व एसबीआइ के खाते से 82 सौ रुपये मुंबई में नेट मार्केटिंग कर उड़ा लिये. मुफस्सिल थाना क्षेत्र के दरियापुर निवासी विजय सिंह के मोबाइल पर 8228081665 नंबर से फोन आया और कहा कि मैं एटीएम विभाग से बोल रहा हूं. आपका एटीएम लिंक में गड़बड़ी के कारण बंद हो गया है. आप अपने एटीएम का 16 डिजिट का अंक बताये. तब एटीएम चालू कर दिया जायेगा. उन्होंने यूको व एसबीआइ बैंक के एटीएम का 16 अंक बता दिया. कुछ देर बाद उनके मोबाइल पर मुंबई में नेट मार्केटिंग करने का मैसेज आने लगा. दोनों एटीएम से 8200 रुपये की नेट मार्केटिंग कर साइबर माफिया ने उड़ा लिया. कहते हैं क्षेत्रीय प्रबंधक एसबीआइ के क्षेत्रीय प्रबंधक शशि कुमार पांडेय ने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति बैंक अधिकारी या कस्टमर केयर बन कर फोन करता है और पूछता है कि अपना एटीएम नंबर व पिन बतायें तो उससे आप सावधान रहे. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले में लड़कियां ज्यादा सक्रिय है और भोले-भाले लोगों को फंसा कर घटना को अंजाम देती है. उनका कहना है कि गोपनीयता ही उपभोक्ताओं की सुरक्षा है. वे किसी भी कीमत पर अपना एटीएम पिन व नंबर किसी को न बतायें.

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