कन्या पूजन का शास्त्रों में है विशेष स्थान

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मुंगेर : नारी शक्ति आधार है, कालचक्र है, ब्रह्मांड के चलयमान होने का जीवात्मा के गति, सृष्टि की रक्षा के लिए नारी शक्ति का आविर्भाव बार-बार हुआ है. देवी की पूजा हर युग में होती रही है क्योंकि वह जननी है. देवी आराधना को सफल बनाने के लिए नवरात्रि के दौरान कुमारी कन्याओं के पूजन […]

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मुंगेर : नारी शक्ति आधार है, कालचक्र है, ब्रह्मांड के चलयमान होने का जीवात्मा के गति, सृष्टि की रक्षा के लिए नारी शक्ति का आविर्भाव बार-बार हुआ है. देवी की पूजा हर युग में होती रही है क्योंकि वह जननी है. देवी आराधना को सफल बनाने के लिए नवरात्रि के दौरान कुमारी कन्याओं के पूजन का विधान है. जिसे पूरे निष्ठा के साथ किया जाता है.

महानवमी को कन्या को देवी का प्रतीक मानकर उसकी पूजा ठीक उसी प्रकार की जाती है जैसे मां दुर्गा की. कन्या पूजा तक उपवास में रहती है. नियत मुहूर्त पर उसकी श्रृंगार की जाती है. नव वस्त्र पहनाया जाता है. फूल-माला से सुसज्जित कर कन्या पूजन किया जाता है. सभी श्रद्धालु नर-नारी हाथ जोड़ कर देवी के प्रतीक के समक्ष नत-मस्तक रहते हैं.

पूजा पूर्ण होने से पूर्व कन्या के पांव धुलाया जाता है और श्रद्धालु अपने आंचल से पांव पोछ कर खुद को धन्य मानते हैं. कई अन्य समुदायों में भी नारी शक्ति को तेज और जीवन को स्रोत माना गया है. इसलिए अपने घरों में भी कुमारी पूजन करते हैं. देवी को प्रसन्न करने का यह अनूठा तरीका है. मान्यता है कि स्त्री का सम्मान और यथोचित आदर करने से महामाया आहलादित होकर भक्तों को अपना आशीर्वाद देती है कन्या पूजन में यह आवश्यक नहीं है कि वह किसी भी विशेष जाति से ताल्लुक रखें.

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