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अपनों ने शव को लावारिस छोड़ झाड़ लिया पलड़ा, रुपये के अभाव में परिजन नहीं करवा पाये दाह संस्कार, सड़क किनारे पड़ा रहा शव

Updated at : 07 May 2019 5:57 AM (IST)
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अपनों ने  शव को लावारिस छोड़ झाड़ लिया पलड़ा, रुपये के अभाव में परिजन नहीं करवा पाये दाह संस्कार, सड़क किनारे पड़ा रहा शव

मुंगेर : मेदनीचौकी थाना क्षेत्र के बसगढ़ा बिंद टोला निवासी कैलाश बिंद के पुत्र नवीन बिंद का शव पुलिस ने गंगा किनारे से बरामद किया. इसके बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गयी. नवीन शुक्रवार की रात ही अपने घर से निकला था और वह फिर वापस घर नहीं लौटा. पुलिस ने शव को अपने कब्जे […]

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मुंगेर : मेदनीचौकी थाना क्षेत्र के बसगढ़ा बिंद टोला निवासी कैलाश बिंद के पुत्र नवीन बिंद का शव पुलिस ने गंगा किनारे से बरामद किया. इसके बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गयी. नवीन शुक्रवार की रात ही अपने घर से निकला था और वह फिर वापस घर नहीं लौटा.

पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भिजवा दिया. जहां पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव को रुपये के अभाव में बिना दाह-संस्कार किये ही पोस्टमार्टम हाउस के पास लावरिस अवस्था में छोड़ कर घर लौट गये. सोमवार की देर शाम तक शव यूं ही सड़क किनारे पड़ा रहा.
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मेदनीचौकी थाना क्षेत्र के बसगढ़ा बिंद टोला निवासी कैलाश बिंद का पुत्र नवीन बिंद मछली बेचने का काम करता था. वह शनिवार की रात लगभग 9 बजे घर में खाना खा कर शौच के लिए बाहर निकला, रात भर वापस घर नहीं लौटा.
इसके बाद परिजनों को किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी और सभी लोग नवीन का खोज करने लगे. परिजनों ने इसकी सूचना स्थानीय थाना में भी दी. इसके बाद पुलिस भी नवीन के खोज में निकल पड़ी. रविवार की दोपहर लगभग दो बजे पुलिस ने नवीन की पत्नी शीला देवी को फोन पर सूचना दी कि गंगा किनारे एक शव मिला है. इसके बाद शीला अन्य परिजनों के साथ गंगा घाट पर पहुंची.
उसने अपने पति की पहचान की. शव का दोनों हाथ व पांव कपड़े से बंधा हुआ था, कमर में रस्सा लगा हुआ था और उसके सीने में दो जगह गोली लगी हुई थी. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेते हुए उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया व सोमवार को शव का पोस्टमार्टम करवा कर उसे परिजनों के हवाले कर दिया.
रुपये के अभाव में अपने ही पति का शव बन गया बोझ
पुलिस द्वारा नवीन का शव पत्नी शीला को सौंप दिये जाने के बाद उसे यह समझ ही नहीं आ रहा था कि अब वह उस शव को कहां लेकर जाये. उसके पास न तो इतना रुपये थे कि किसी वाहन पर वह अपने पति के शव को लेकर घर तक जा सके या फिर उस शव को लाल दरवाजा घाट पर ही दाह-संस्कार कर सके.
शीला अपने डेढ़ साल के मासूम बेटे के साथ सोमवार की शाम तक पोस्टमार्टम हाउस के पास ही बैठी रही. पिछले दो दिन से उसने कुछ खाया भी नहीं था. इसके बाद पत्रकारों ने आपसी सहयोग से उसे बोतल बंद पानी और बिस्किट उपलब्ध कराया.
शीला ने बताया कि उसके पास इतना भी पैसा नहीं है कि वह किसी वाहन से अपने घर तक वापस लौट सके. संभवत: किसी सज्जन ने उसे घर तक जाने के लिए किराये का पैसा दिया. इसके बाद वह अपने पति के शव को पोस्टमार्टम हाउस के पास लावारिस अवस्था में ही छोड़ कर घर चली गयी. शाम में किसी ने उस शव को राम नाम लिखे कफन से ढंक दिया, पर देर शाम तक शव लावारिस अवस्था में पोस्टमार्टम हाउस के पास ही पड़ा हुआ था.
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