प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के मामले में कोतवाल पर होगी कार्रवाई, अनुशंसा

Published at :08 Nov 2017 5:52 AM (IST)
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प्राथमिकी दर्ज नहीं करने के मामले में कोतवाल पर होगी कार्रवाई, अनुशंसा

एसपी ने डीआइजी से की कार्रवाई की अनुशंसा मुंगेर : न्यायालय के आदेश के बावजूद कोतवाली थानाध्यक्ष द्वारा एफआइआर दर्ज नहीं करने तथा यह कहते हुए कि कोतवाली थाने में कोई भी पुलिस पदाधिकारी अंग्रेजी के जानकार नहीं है. इसलिए प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान करना मुश्किल है. परिवाद पत्र को वापस न्यायालय भेजे जाने के […]

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एसपी ने डीआइजी से की कार्रवाई की अनुशंसा

मुंगेर : न्यायालय के आदेश के बावजूद कोतवाली थानाध्यक्ष द्वारा एफआइआर दर्ज नहीं करने तथा यह कहते हुए कि कोतवाली थाने में कोई भी पुलिस पदाधिकारी अंग्रेजी के जानकार नहीं है. इसलिए प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान करना मुश्किल है. परिवाद पत्र को वापस न्यायालय भेजे जाने के मामले में अब कोतवाली थानाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ हो गयी है. पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने कोतवाल श्रीराम चौधरी के विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीआइजी को अनुशंसा भेजी है.
क्या है मामला : हरियाणा गुड़गांव के कांमेट इंजीनियरिंग वर्क्स के प्रोपराइटर महेंद्र सिंह ने हैदराबाद के एक कंपनी केएसआर इंट्राटेक इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के सीइओ डॉ वाइ किरण कुमार पर मुंगेर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में जालसाजी का परिवाद पत्र दायर किया था. 22 मई 2017 को यह परिवाद दायर किया गया था. परिवाद पत्र संख्या 499सी/17 के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने कोतवाली थानाध्यक्ष को प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान का आदेश दिया था.
किंतु कोतवाली थानाध्यक्ष न्यायालय के आदेश के बावजूद एफआइआर दर्ज करने को तैयार नहीं है. पांच माह के दौरान लगातार न्यायालय इस मामले में एफआइआर दर्ज कराने के लिए आदेश निर्गत करता रहा है और थानाध्यक्ष न्यायालय के आदेश को नजरअंदाज करता रहा है. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने जिस मामले में कोतवाली थाना पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था उसके मूल आवेदन को चार माह बाद कोतवाली थानाध्यक्ष श्रीराम चौधरी ने न्यायालय को वापस कर दिया. उन्होंने मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी को भेजे अपने ज्ञापांक 1463/17 में कहा है कि ” परिवाद पत्र संख्या 499सी/17 मूल आवेदन पत्र प्राप्त हुआ है.
परिवाद के मूल आवेदन के साथ संलग्न प्रतिवेदन जो अंग्रेजी में अंकित किया हुआ रहने के कारण कांड अंकित नहीं किया गया है. कोतवाली थाना में अंग्रेजी के जानकार पदाधिकारी एक भी नहीं रहने के कारण कांड के अनुसंधान में काफी कठिनाई हो सकती है. जिसे वापस किया जाता है. ”
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