सिर्फ 29 फीसदी बच्चों को कार्ड

Published at :06 Sep 2017 3:54 AM (IST)
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सिर्फ 29 फीसदी बच्चों को कार्ड

मुंगेर : एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग नौनिहालों को स्वस्थ रखने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चला रखी है़ वहीं दूसरी ओर जिला स्वास्थ्य समिति की उदासीनता के कारण जिले भर के अधिकांश बच्चे अब तक स्वास्थ्य कार्ड की सुविधा से महरूम है़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले को वित्तीय वर्ष 2017- 18 में शून्य […]

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मुंगेर : एक ओर जहां स्वास्थ्य विभाग नौनिहालों को स्वस्थ रखने के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चला रखी है़ वहीं दूसरी ओर जिला स्वास्थ्य समिति की उदासीनता के कारण जिले भर के अधिकांश बच्चे अब तक स्वास्थ्य कार्ड की सुविधा से महरूम है़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले को वित्तीय वर्ष 2017- 18 में शून्य से 18 वर्ष तक के कुल 1,77,315 बच्चों के स्वास्थ्य कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है़ किंतु अगस्त माह तक जिले भर में मात्र 51,476 बच्चों का ही स्वास्थ्य कार्ड बन पाया है़ अब बाकी के 7 महीने में 1,25,839 बच्चों का स्वास्थ्य कार्ड बन पाना काफी मुश्किल सा लग रहा है़ क्योंकि अब पर्व-त्योहार तथा ठंड का मौसम आने वाला है जिससे यह कार्य और भी प्रभावित हो जाने की संभावना है़

29.03 प्रतिशत ही मिल पायी है उपलब्धि: चालू वित्तीय वर्ष में जिले को कुल 1,77,315 बच्चों के स्वास्थ्य कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है़ लक्ष्य के अनुकूल अगस्त माह तक सिर्फ 29.03 प्रतिशत कार्य पूरा हो पाया है़ इस कारण जिले भर के आंगनबाड़ी व सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 1,25,839 बच्चे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से बिल्कुल अछूते रह गये हैं. हाल यह है कि बांकी बच्चों को गंभीर चिकित्सा लाभ मिलना तो दूर, स्वास्थ्य जांच से भी वंचित रहना पड़ रहा है़
पर्याप्त नहीं है मेडिकल टीम: राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिले में कुल 18 मेडिकल टीम की जरूरत है़ किंतु वर्तमान समय में सिर्फ 11 टीम ही काम रही है़ वहीं कुल 36 चिकित्सक के स्थान पर वर्तमान समय में सिर्फ 20 चिकित्सक ही इस कार्यक्रम में काम कर रहे हैं. इसके कारण भी जिले में बच्चों के स्वास्थ्य कार्ड बनाने की गति काफी मंथर चल रही है़ मालूम हो कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बनायी गयी मेडिकल टीम में दो आयुष चिकित्सक, एक एएनएम तथा एक फर्मासिस्ट को शामिल किया जाता है़ जो आंगनबाड़ी तथा सरकारी विद्यालयों में जा-जा कर शून्य से 18 साल तक के बच्चों का स्वास्थ्य जांच करते हैं तथा कोई गंभीर बीमारी पाने पर बच्चे को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडलीय अस्पताल, जिला अस्पताल या फिर विशेष चिकित्सा संस्थान में भेजा जाता है़
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