नीट पेपर लीक का मास्टरमाइंड निकला RJD नेता, आलीशान घर में रहते हैं, जानिए संतोष जायसवाल की पूरी कहानी

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 14 May 2026 7:16 PM

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आरोपी संतोष जायसवाल

Santosh Jaiswal: पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन से निकलकर दिल्ली, मुंबई और पटना की राजनीति में सक्रिय हुए संतोष जायसवाल अब NEET और MBBS एडमिशन रैकेट मामले में चर्चा के केंद्र में हैं. आइये इनके बारे में जानते हैं.

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Santosh Jaiswal: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की कार्रवाई के बाद अचानक चर्चा में आए संतोष कुमार जायसवाल का नाम अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है. NEET परीक्षा के कथित पेपर और MBBS एडमिशन रैकेट मामले में गिरफ्तारी के बाद उनका राजनीतिक और व्यक्तिगत सफर चर्चा में है. पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन उत्तरी पंचायत से निकलकर दिल्ली, मुंबई, पटना और बिहार की सक्रिय राजनीति तक पहुंचे संतोष जायसवाल की कहानी अब कई सवाल खड़े कर रही है.

संतोष कुमार जायसवाल मूल रूप से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन उत्तरी पंचायत के निवासी हैं. गांव में उनका अच्छा-खासा प्रभाव माना है. उन्होंने आलीशान घर बनवाया हुआ है. उनके पास संसाधन की कोई कमी नहीं है. गांव से जुड़ाव होने के बावजूद उनका अधिकतर समय मुंबई, दिल्ली और पटना जैसे बड़े शहरों में ही बीता. स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान ऐसे व्यक्ति की रही, जो गांव से निकलकर बड़े राजनीतिक और कारोबारी संपर्क बनाने में सफल रहा.

हवाई यात्रा में हुई मुलाकात, फिर खुला राजनीति का रास्ता

बताया जाता है कि दिल्ली से मुंबई की एक हवाई यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात राजद के एक वरिष्ठ नेता से हुई थी. इसी सफर के दौरान बातचीत बढ़ी और यहीं से उनकी राजनीतिक एंट्री का रास्ता तैयार हुआ. मुंबई से लौटने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल जॉइन किया. पार्टी में उन्हें सिर्फ सदस्यता ही नहीं मिली, बल्कि संगठन में बड़ा पद भी मिला. संतोष जायसवाल को राष्ट्रीय सचिव जैसे अहम दायित्व के साथ पहचान दी गई, जिससे बिहार की राजनीति में उनकी सक्रियता तेजी से बढ़ी.

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद संतोष जायसवाल ने पूर्वी चंपारण में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश तेज कर दी. पहले उन्होंने ढाका विधानसभा क्षेत्र में सक्रियता दिखाई. इसके बाद घोड़ासहन क्षेत्र में तैयारी शुरू की. जगह-जगह पोस्टर, बैनर और जनसंपर्क के जरिए उन्होंने खुद को संभावित उम्मीदवार के रूप में स्थापित करने की कोशिश की. बाद में पार्टी स्तर पर मिले संकेतों और सलाह के बाद उन्होंने रक्सौल विधानसभा क्षेत्र में भी अपनी सक्रियता बढ़ाई.

रक्सौल में रिश्तेदार के घर रहकर साधी राजनीतिक जमीन

रक्सौल में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए संतोष जायसवाल ने स्थानीय स्तर पर डेरा डाला. बताया जाता है कि उन्होंने मौजे मुहल्ला क्षेत्र में एक रिश्तेदार के घर को आधार बनाकर क्षेत्रीय राजनीति को साधने की कोशिश की.

बड़े नेताओं के कार्यक्रमों से पहले मोतिहारी, रक्सौल, ढाका और घोड़ासहन जैसे इलाकों में उनकी सक्रिय मौजूदगी दिखाई देती थी. इससे वह स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता के बीच खुद को प्रभावशाली नेता के तौर पर स्थापित करना चाहते थे.

जब उन्हें किसी विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिला, तो धीरे-धीरे उनकी सक्रियता बिहार की जमीनी राजनीति से कम होती गई. इसके बाद उन्होंने फिर दिल्ली का रुख किया.

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दिल्ली लौटने के बाद बदली दिशा

दिल्ली वापसी के बाद संतोष जायसवाल का नाम कथित तौर पर विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, एडमिशन सेटिंग और संपर्क आधारित नेटवर्किंग से जोड़ा जाने लगा. पुलिस जांच के मुताबिक अब उन पर आरोप है कि उन्होंने NEET और MBBS एडमिशन के नाम पर बड़े स्तर पर नेटवर्क खड़ा किया. हालांकि इन आरोपों की जांच जारी है, लेकिन गिरफ्तारी के बाद उनका राजनीतिक सफर अब विवादों के घेरे में आ गया है.

संतोष जायसवाल का सफर गांव की पहचान, बड़े शहरों की मौजूदगी, राजनीतिक संपर्क, संगठन में बड़ा पद और फिर गंभीर आपराधिक आरोपों तक पहुंचा है. पूर्वी चंपारण में कभी पोस्टर और बैनर के जरिए खुद को स्थापित करने की कोशिश करने वाला यह चेहरा अब दिल्ली पुलिस की जांच का बड़ा नाम बन चुका है.

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Paritosh Shahi

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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