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अखंड भारत के सच्चे पैरोकार व पक्षधर थे वीर सावरकर

Updated at : 12 Aug 2024 10:16 PM (IST)
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अखंड भारत के सच्चे पैरोकार व पक्षधर थे वीर सावरकर

भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एवं जेएमडीपीएल महिला कॉलेज के राजनीति शास्त्र विभाग द्वारा सोमवार को राष्ट्रीय एकता के संदर्भ में वीर सावरकर के दृष्टिकोण और सुझाव विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया.

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मधुबनी. भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एवं जेएमडीपीएल महिला कॉलेज के राजनीति शास्त्र विभाग द्वारा सोमवार को राष्ट्रीय एकता के संदर्भ में वीर सावरकर के दृष्टिकोण और सुझाव विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार का आयोजन महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधान पार्षद सर्वेश कुमार थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मो. रहमतुल्लाह ने किया. अध्यक्षीय भाषण करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वीर सावरकर ने योगदान देकर अपनी अमिट छाप छोड़ी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए जो अपना जीवन कुर्बान कर देते हैं वही सच्चे राष्ट्रभक्त होते हैं. मुख्य अतिथि विधान पार्षद सर्वेश कुमार ने कहा कि वीर सावरकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के प्रेरणा स्रोत थे. उन्होंने अपनी प्रखर मेधा शक्ति, तार्किक व तथ्यात्मक विवेचना के बल पर 1857 के विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में मान्यता दिलायी. एलएनएमयू के सिनेट एवं सिंडिकेट सदस्य डॉ. अमर कुमार ने कहा कि वीर सावरकर से अंग्रेज सर्वाधिक भयभीत एवं आशंकित रहते थे. इसका प्रमाण है कि उन्हें अंग्रेजों द्वारा दो बार आजीवन कारावास की सजा दी गयी. एलएनएमयू के राजनीतिक शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ मुनेश्वर यादव ने कहा कि सावरकर के अनुसार कानून की दृष्टि में सभी नागरिकों को समान होना चाहिए. न किसी की उपेक्षा न किसी को विशेषाधिकार. उनका रोम रोम राष्ट्र को समर्पित था. मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए आईसीपीआर नई दिल्ली के पूर्व सदस्य सचिव डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि सावरकर अखंड भारत के पैरोकार व पक्षधर थे. सावरकर सभी भारतीय धर्म को हिंदुत्व में शामिल करते थे. हिंदू राष्ट्र का अपना दृष्टिकोण पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में फैले अखंड भारत के रूप में प्रस्तुत करते थे. डॉ. वाईएल दास ने कहा कि सावरकर जब 16 वर्ष के थे तो उन्होंने मित्र मेला समूह का गठन किया. जिसका मुख्य उद्देश्य पूर्ण राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करना था. बाद में समूह का नाम बदलकर अभिनव भारत कर दिया गया एमएलएसएम कॉलेज दरभंगा के अवकाश प्राप्त शिक्षक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि सावरकर ने कभी भी अंग्रेजों से माफी नहीं मांगी. वीर सावरकर महान स्वतंत्रता सेनानी थे. सेमिनार में एल एनएमयू स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के डॉ. जमील अंसारी सहित महाविद्यालय की छात्राओं ने भी सावरकर के जीवनी पर प्रकाश डाला. मंच संचालन डॉ. विनय कुमार दास व धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अमर कुमार ने किया.

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