हीटवेब के थपेड़ों से खुद को रखें सुरक्षित

Published by :DIGVIJAY SINGH
Published at :31 Mar 2025 10:22 PM (IST)
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हीटवेब के थपेड़ों से खुद को रखें सुरक्षित

दिन प्रतिदिन तापमान में वृद्धि के साथ ही गर्म हवाओं के थपेड़ो से मार्च माह समाप्त होते ही भीषण गर्मी का एहसास होने लगा है.

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मधुबनी . दिन प्रतिदिन तापमान में वृद्धि के साथ ही गर्म हवाओं के थपेड़ो से मार्च माह समाप्त होते ही भीषण गर्मी का एहसास होने लगा है. राजेंद्र क़ृषि विश्वविद्यालय पुसा से मिली जानकारी अनुसार अगले दो दिनों तक अधिकतम तापमान 36-38 डिग्री रहने की संभावना है. इस दौरान 15-20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछिया हवा चल सकती है. मौसम का मिजाज कुछ दिनों तक ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में आमलोगों की परेशानी बढ़ सकती है. ऐसे में डाक्टरों ने लोगों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है. गर्मी व हीटवेब से कुछ सावधानी बरतकर अपने को सुरक्षित रखा जा सकता है. चिकित्सकों ने कहा कि किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर पीड़ित व्यक्ति को इलाज के लिए अपने चिकित्सक व नजदीकी अस्पताल में जाना चाहिए. इससे समय रहते बीमारी का पता लगाकर सही इलाज किया जा सके. हीट वेब एवं भीषण गर्मी को देखते हुए सदर अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस सहित अन्य जीवन रक्षक दवा का भंडारण किया गया है. ताकि हीटवेब की चपेट में आने वाले मरीजों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो. वर्तमान में पेट खराब, कोल्ड कफ व बुखार के अधिक मरीज इलाज के लिए अस्पताल आ रहे हैं. सदर अस्पताल में दवा किल्लत नहीं है. हीट स्ट्रोक से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए सीएस डॉ. हरेंद्र कुमार ने अधीक्षक सदर अस्पताल, उपाधीक्षक अनुमंडलीय अस्पताल सहित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है. सीएस ने सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आईवी फ्लुड एवं ओआरएस प्रयाप्त मात्रा में रखने का निर्देश दिया है. छह माह तक के शिशुओं को करायें सिर्फ स्तनपान सदर अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कुणाल आनंद ने कहा कि 6 माह तक के शिशुओं के लिए सिर्फ स्तनपान ही पर्याप्त होता है. गर्मी के कारण स्तनपान के साथ किसी भी प्रकार का तरल पेय पदार्थ या पानी बच्चों को नहीं देना चाहिए. गर्मी के मौसम में अधिक से अधिक बार स्तनपान कराकर गर्मी के कारण होने वाली विभिन्न समस्याओं से बच्चों को सुरक्षित किया जा सकता है. ऐसे पहचानें लू के लक्ष्ण सिर में तेज दर्द का होना, उल्टी या जी मचलाना, बुखार होना, त्वचा का लाल गर्म एवं सूखा होना, पसीना नहीं चलना, बेहोशी या चक्कर आना, घबराहट या संशय का बढ़ जाना, अत्यधिक आलस या सुस्ती का होना लू के लक्षण हैं. दैनिक दिनचर्या व आहार परिवर्तन जरूरी सिविल सर्जन ने कहा कि गर्मी के बढ़ने से पसीना चलना शुरू होता है. इससे शरीर में पानी की मात्रा में तेजी से कमी आती है. इसलिए इस मौसम में प्रचुर मात्रा में पानी का सेवन करना फायदेमंद है. इसके साथ ही मौसमी फलों और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी शरीर में पानी की मात्रा को संतुलित करने में सहायक होता है.

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