गांडिवेश्वरनाथ महादेव मंदिर में श्रावणी मेले की तैयारी पूरी

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 21 Jul 2024 9:06 PM

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प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर इंडो नेपाल सीमा और पड़ोसी जिला सीतामढ़ी के सीमा पर स्थित शिवनगर गांव में बाबा गांडिवेश्वर नाथ महादेव मंदिर में श्रावणी मेले की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है.

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बेनीपट्टी. प्रखंड मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर इंडो नेपाल सीमा और पड़ोसी जिला सीतामढ़ी के सीमा पर स्थित शिवनगर गांव में बाबा गांडिवेश्वर नाथ महादेव और उससे करीब तीन किलोमीटर दूर बर्री गांव स्थित महाभारतकालीन बाणेश्वर मंदिर में श्रावणी मेले की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है. श्रद्धालुओं के आने-जाने व रहने के लिये भोजन व रहने की व्यवस्था की गयी है. श्रावण मास के सभी सोमवार को काफी संख्या में दूर दराज से आने वाले शिव भक्तों के ठहरने और शृंगार पूजन के लिये मंदिर प्रबंधन की ओर से तैयारी की जा रही है. इन दोनों स्थलों पर चबूतरा, रौशनी, पेयजल आदि की व्यवस्था की गयी है. पड़ोसी देश नेपाल के हजारों श्रद्धालु यहां भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना व कामनाओं की पूर्ति के लिये पहुंचते हैं. बता दें कि शाहपुर पंचायत के शिवनगर गांव में उत्तर पश्चिम कोने पर अवस्थित गांडिवेश्वर नाथ महादेव मंदिर को भी अब तक पर्यटन स्थल में शामिल नहीं किये जाने से आस-पास के लोगों में निराशा व्याप्त है. गांडिवेश्वर स्थान वह स्थान है, जहां भगवान शिव ने अर्जुन को गांडीव प्रदान किया था. तब से लोग इस गांव को शिवनगर के नाम से जानने लगे. वहीं बाणेश्वर स्थान वाणगंगा के नाम से जाना जाता है. किवदंति है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान गांडिवेश्वर स्थान के पास अपना कुछ समय बिताया था. तब इस इलाके में घनघोर जंगल था. इसी क्रम में प्यास से तड़पती गाय को देख धर्नुधर अर्जुन ने धरती में बाण मारकर गंगा की धारा को निकाला था. जिससे प्यासी गाय पानी पीकर अपनी प्यास बुझायी थी. अब भी उक्त स्थल के पास वह पवित्र सरोवर है. तब से यह स्थल वाणगंगा के नाम से जानी जाने लगी. इसी स्थल पर कालांतर में शिव मंदिर का निर्माण कराकर शिवलिंग की स्थापना करायी गयी. इन दोनों मंदिर का संबंध महाभारतकाल से जुड़ा होने के बावजूद भी उपेक्षित है. ग्रामीण रमेशचंद्र मिश्र, चंद्रमणि कुमार, नवीन मिश्र, हरि पासवान, कमल बैठा, मुकेश कुमार सिंह, समीर झा मोनू , प्रकाश झा, समीर झा मोनू, छोटन महादेव, त्रिलोक महादेव, गौतम महादेव, मालिक झा, सुनील झा, रमन झा व आनंदी पंडा सहित कई लोगों ने कहा कि खासकर गांडिवेश्वरनाथ स्थान में देवाधिदेव महादेव शेष रूप से रोजाना एक पहर बाबा वैद्यनाथ के रूप में विराजमान होते हैं. यही कारण है कि इस स्थान से बाबा का कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. भगवान भोलेनाथ यहां सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं. लोगों ने यह भी कहा कि इन दोनों स्थल पर पौराणिक व महाभारतकालीन होने के कारण सावन महीने के सभी सोमवारी और महाशिवरात्रि के दिन भारत के विभिन्न राज्यों व पड़ोसी देश नेपाल से भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं की जत्था पूजा अर्चना के लिये पहुंचते हैं.

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