कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

Updated at : 29 Apr 2024 10:03 PM (IST)
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कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

जिला केंद्रीय पुस्तकालय परिसर में मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति मधुबनी के तत्वावधान में अरुणिमा साहित्यिक गोष्ठी डा. बिभा कुमारी की अध्यक्षता में हुई.

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मधुबनी. जिला केंद्रीय पुस्तकालय परिसर में मैथिली साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समिति मधुबनी के तत्वावधान में अरुणिमा साहित्यिक गोष्ठी डा. बिभा कुमारी की अध्यक्षता में हुई. गोष्ठी में मधुबनी के ग्रामीण अंचल से एक दर्जन से अधिक साहित्यकार उपस्थित होकर अपनी रचनाओं का पाठ किया. विनोद कुमार झा एकल माय आओर कन्दर्पी घाट कविताक पाठ किया. सीताक को लक्ष्य कर लिखी गयी कविता एकल माय को स्रोताओं ने खूब सराहा. दिनेश चन्द्र झा ने अपनी कविता ””””””””भ्रम मे जीबयै लोक”””””””” दार्शनिक अंदाज में प्रस्तुत कर स्रोताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल रहे. प्रीतम कुमार निषाद ने ””””””””चिंताक चाक”””””””” कविता का पाठ किया. सुभेष चन्द्र झा की कविता ””””””””हमहीं खुअबैत छी”””””””” कविता ने खूब तालियां बटोरी. डाॅ रवींद्र झा ””””””””नेता आ चमचा, डा. श्रीदेव लाल कर्ण ने ””””””””पुष्पवाटिका, डा. शुभ कुमार बर्णवाल ने वीर कुंवर सिंह, दिलीप कुमार झा ने ”””””””” जाहि दिन शंकर ध”””””””” लेलनि ह””””””””रक लागनि”””””””” कविता का पाठ कर एक अलग संदेश देने में सफल रहे. डा .बिभा कुमारी की कविता म ””””””””विद्याक भवन”””””””” में शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने पर जोड़ दिया. रेवतीरण झा पिता और प्रभाष कुमार दमन ने ””””””””कविक आश”””””””” कविता का पाठ किया। सभी कविता समकालीनता बोध आओर प्रगतिशीलता से ओत-प्रोत थी. कथा सत्र में भी समकालीन समाज की विभिन्न समस्या को चित्रित किया गया. चण्डेश्वर खां ने जल संकट को लक्ष्य करते हुए ””””””””हेल्पलाइन”””””””” लघुकथा का वाचन किया. हीरेन्द्र कुमार झा की कथा ””””””””विवशता”””””””” गरीबी आओर अभाव में अभी भी कैसे लोग जीवन काट रहे हैं, उसे उजागर करने में सफल रही. मालती मिश्र की कथा ””””””””बिडंबना”””””””” स्त्री की अंतर्मन की पीड़ा को बहुत गंभीरता से उजागर करने में सफल रही. सोनू कुमार झा ने छाहरि कथा का पाठ किया. दर्शक दीर्घा से आनंदमोहन झा ने गोष्ठी के आयोजन की सरहाना की. झौली पासवान ने भी पठित रचनाओं पर अपने विचार रखे. संगोष्ठी का संचालन प्रभाष कुमार दमन, पठित रचना की समीक्षा डाॅ वीरेन्द्र झा व धन्यवाद ज्ञापन समिति के अध्यक्ष श्री प्रीतम कुमार निषाद ने किया. संगोष्ठी के आयोजन में पुस्तकालयाध्यक्ष बिजय शंकर पासवान व मायानंद मिश्र का सहयोग सराहनीय रही.

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