Madhubani News: शादी का झांसा देकर नाबालिग से दुष्कर्म, आरोपी को 10 वर्ष की सजा और जुर्माना

Published by : Sarfaraz Ahmad Updated At : 12 Jun 2026 5:10 PM

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न्यायालय परिसर

मधुबनी के भैरवस्थान थाना क्षेत्र में नाबालिग से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी कमलेश मुखिया को 10 वर्ष कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. अदालत ने पीड़िता को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है. पढ़ें पूरी खबर...

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मधुबनी से अजय आनंद की रिपोर्ट

Madhubani News: भैरवस्थान थाना क्षेत्र में नाबालिग से शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में जिला अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम सह विशेष न्यायाधीश पॉक्सो नीरज कुमार त्यागी की अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. न्यायालय ने आरोपी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

चार वर्ष पुराने मामले में आया फैसला

विशेष लोक अभियोजक के अनुसार यह मामला करीब चार वर्ष पुराना है. आरोपी कमलेश मुखिया पर आरोप था कि उसने नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण किया.

सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एवं पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी पाया. न्यायालय ने 10 वर्ष कारावास के साथ पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया. जुर्माना नहीं देने की स्थिति में आरोपी को तीन माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

गर्भवती होने के बाद कराया गया गर्भपात

अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ दुष्कर्म करता रहा, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई. आरोप है कि जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया तो आरोपी उसे झंझारपुर स्थित एक अस्पताल ले गया और धोखे से गर्भपात करा दिया. इसके बाद जब पीड़िता के परिजनों ने शादी की बात की तो आरोपी ने उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की. मामले को लेकर पीड़िता ने झंझारपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

पीड़िता को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति

न्यायालय ने पीड़िता को हुए मानसिक आघात और पीड़ा को देखते हुए दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश भी दिया है. यह राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकार के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे मामलों में पीड़ित को न्याय दिलाने के साथ-साथ उसके पुनर्वास और मानसिक सहयोग की भी आवश्यकता होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.

दोनों पक्षों ने रखी अपनी दलील

सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक कुमारी मधुरानी ने आरोपी को अधिकतम सजा देने की मांग की थी. वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता लोकेश नाथ मिश्रा ने कम सजा देने का अनुरोध किया था.

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लेखक के बारे में

By Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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