Madhubani News : कचरे से कंचन: मधुबनी की पंचायतों ने प्लास्टिक कचरे को बनाया कमाई का जरिया
Updated at : 13 Jan 2026 9:58 PM (IST)
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बिहार का मधुबनी जिला कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नयी मिसाल पेश कर रहा है.
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Madhubani News : मधुबनी:
बिहार का मधुबनी जिला कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नयी मिसाल पेश कर रहा है. लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (फेज-2) के तहत जिले की ग्राम पंचायतें अब प्लास्टिक कचरे को समस्या नहीं, बल्कि आय का साधन बना रही हैं. कभी गलियों में गंदगी और बीमारी फैलाने वाला यह प्लास्टिक अब पंचायतों के लिए राजस्व और स्वच्छता की नयी पहचान बन गयी है.स्वच्छता के साथ आत्मनिर्भरता की ओर कदम जिले में प्रतिदिन औसतन छह से सात टन प्लास्टिक कचरा निकलता है. प्रशासन की पहल पर अब घर-घर से सूखा और गीला कचरा अलग किया जा रहा है. इसमें से प्लास्टिक और बोतलों को छांटकर ”प्लास्टिक अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई” भेजा जाता है, जहां बेलिंग मशीन से इन्हें कंप्रेस कर रिसाइक्लिंग एजेंसियों को बेचा जा रहा है. इस अभियान से न केवल गांव साफ हो रहे हैं, बल्कि ”स्वच्छता दीदियों” और स्वयं सहायता समूहों को रोजगार भी मिल रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं. राजस्व और भविष्य की योजनाएं आंकड़ों के अनुसार, 5 जनवरी 2026 तक जिले में 24,928 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र किया गया, जिसमें से 19,590 किलोग्राम की बिक्री से पंचायतों को 1,75,838 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है. वर्तमान में पंडौल प्रखंड के सकरी में स्थित यूनिट सफलतापूर्वक संचालित हो रही है, जबकि रहिका, बिस्फी, जयनगर और झंझारपुर में इकाइयां तैयार हैं. उप विकास आयुक्त सुमन प्रसाद साह ने बताया कि यह मॉडल कचरे से आत्मनिर्भरता और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रहा है. यदि सभी इकाइयां पूरी क्षमता से काम करने लगें, तो मधुबनी पूरे राज्य के लिए स्वच्छता का एक सफल मॉडल बनकर उभरेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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