प्लास्टिक वेस्ट बेचकर पंचायत ने कमाए 1 लाख 87 हजार रुपये, स्वच्छता के साथ आमदनी का भी बना मॉडल
प्लास्टिक वेस्ट को अलग करते स्वच्छता कर्मी | Prabhat Khabar Network
मधुबनी जिले की 388 पंचायतों ने प्लास्टिक कचरे को एक बड़ी चुनौती से आमदनी के स्रोत में बदल दिया है. इन पंचायतों ने प्लास्टिक वेस्ट को रीसाइक्लिंग के लिए भेजकर लगभग ₹1.87 लाख की आय अर्जित की है, जो ग्रामीण विकास का एक नया मॉडल पेश करता है.
Plastic Waste Management: मधुबनी जिला के प्लास्टिक कचरे को जहां आमतौर पर पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है, वहीं जिले के 21 प्रखंडों की 388 पंचायतों ने इसे आमदनी का जरिया बनाकर एक मिसाल पेश की है. पंचायत स्तर पर एकत्र किए गए प्लास्टिक वेस्ट को व्यवस्थित तरीके से अलग कर कबाड़ एवं रिसाइक्लिंग के लिए प्रखंड स्थित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट भेजा गया, जहां प्लास्टिक वेस्ट बेचने से करीब 1 लाख 87 हजार रुपये की आय हुई. इस पहल ने न सिर्फ पंचायत क्षेत्र को स्वच्छ रखने में मदद की, बल्कि कचरे के बेहतर प्रबंधन से आर्थिक लाभ का रास्ता भी खोल दिया. पंचायतों के इस प्रयास की खास बात यह रही कि घरों और सार्वजनिक स्थलों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे को इधर-उधर फेंकने के बजाय संग्रहित कर अलग-अलग किया गया. इसके बाद उपयोगी प्लास्टिक को रिसाइक्लिंग के लिए भेजा गया, जिससे गांव में गंदगी और प्लास्टिक प्रदूषण कम हुआ. इससे यह संदेश सामने आया है कि कचरा केवल समस्या नहीं, सही प्रबंधन होने पर संसाधन भी बन सकता है. स्वच्छता के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में उठाया गया यह कदम ग्रामीण विकास का अनुकरणीय उदाहरण है.
Madhubani News: कौन सा प्रखंड रहा सबसे आगे
जिले में सबसे ज्यादा प्लास्टिक कचरा जयनगर प्रखंड से 2,656 किग्रा इकट्ठा किया गया. वहीं, लदनिया प्रखंड ने प्लास्टिक बेचकर सबसे ज्यादा 24,555 रुपये की कमाई की. इसके अलावा, झंझारपुर प्रखंड ने 1,675 किग्रा में से पूरा कचरा बेचकर 16,750 रुपये कमाए, जबकि बेनीपट्टी और बिस्फी ने भी क्रमशः 14,685 और 13,820 रुपये की आय दर्ज की.
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान का उद्देश्य
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देना, खुले में शौच से मुक्ति को बनाए रखना तथा ठोस एवं तरल अपशिष्ट का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करना है. इस अभियान के तहत कचरा प्रबंधन को सिर्फ स्वच्छता तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलकर पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं. प्लास्टिक वेस्ट की बिक्री से हुई यह आय इसी अभियान के उद्देश्य को धरातल पर साकार करने की एक बेहतरीन मिसाल है.
कुल आंकड़े (एक नजर में)
- कुल संग्रहित कचरा: 26,004 किग्रा
- कुल बेचा गया कचरा: 20,829 किग्रा
- कुल आय: 1,87,603 रुपये
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और अधिक कचरा इकट्ठा कर आय बढ़ाने का लक्ष्य है. साथ ही, लोगों को प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है.
क्या कहते हैं अधिकारी
डीआरडीए के निदेशक सैयद सरफराजुद्दीन अहमद ने कहा कि लोहिया स्वच्छ बिहार योजना के तहत गांव-गांव से प्लास्टिक कचरा इकट्ठा कर उसे रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा रहा है. इससे एक तरफ गांव साफ हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ पंचायतों को अतिरिक्त आय भी मिल रही है.
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