भारतीय सैनिकों के अनुशासन, साहस व कुशल नेतृत्त्व का फल है कारगिल विजय
Updated at : 26 Jul 2024 9:55 PM (IST)
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34 एनसीसी बिहार बटालियन के ग्रूप कमांडर कैप्टन आईबी ठाकुर ने कहा कि 25 वर्ष पहले पाकिस्तान ने कारगिल में छद्म युद्ध शुरू किया तो उसका समापन भारतीय सेना ने पराक्रम से किया.
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मधुबनी. शहर के आरके कॉलेज में शुक्रवार को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मौके पर 34 एनसीसी बिहार बटालियन के ग्रूप कमांडर कैप्टन आईबी ठाकुर ने कहा कि 25 वर्ष पहले पाकिस्तान ने कारगिल में छद्म युद्ध शुरू किया तो उसका समापन भारतीय सेना ने पराक्रम से किया. जनरल परवेज मुशर्रफ की ख्वाहिश थी कि भारतीय भूमि पर छद्म रूप से हमला करने की. लेकिन 500 से अधिक भारतीय जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारतीय सीमा की रक्षा कर शौर्य और पराक्रम का नया इतिहास रचा. फलतः 26 जुलाई 1999 को कारगिल युद्ध जीता गया और पाकिस्तान के ढाई हजार से ज्यादा सैनिक मारे गए. कारगिल की लड़ाई में दुश्मन की सेना पर मिग विमानों से बमवर्षा करनेवाले तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर एवं बाद में ग्रुप कैप्टेन के रूप में प्रोन्नत आईबी ठाकुर ने कहा कि बेनीपट्टी प्रखंड के बरहा निवासी ग्रूप कैप्टेन ठाकुर 19 अगस्त 1982 में भारतीय वायुसेना में एक अफसर के रूप में कमीशंड हुए और कारगिल की लड़ाई में सक्रिय रूप से भाग लिया था. कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. एके मंडल ने एनसीसी कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्हें गौतम बुद्ध के जीवन से भी प्रेरणा लेने की बात कही. उन्होंने जीवन में एकता और अनुशासन के महत्त्व पर काफी गंभीरता से अपना विचार रखा. ईएमई के सूबेदार ऑनरेरी कैप्टेन मोहनचंद्र झा ने कारगिल युद्ध में भाग लिया था. पंडौल के ककना गांव निवासी ऑनरेरी कैप्टेन ने कहा कि भारतीय सेना विषम परिस्थितियों में भी अपना परचम लहराने में कामयाब हुई. हमारी ट्रेनिंग इतनी कठोर थी कि हम सब कुछ बर्दाश्त कर दुश्मन के पोस्टों पर कब्जा करने में कामयाब हुए. इसी तरह 12 महार रेजीमेंट से सेवानिवृत्त और बेनीपट्टी के नागदह गांव निवासी सूबेदार मेजर कृष्णकांत झा ने कहा कि उनके बटालियन की एक कंपनी को दुश्मनों ने पूरी तरह बर्बाद कर दिया. फिर नए सीओ के साथ मैं जवानों को लेकर अपनी पोस्ट पर गया और भीषण लड़ाई में दुश्मनों पर हमारी यूनिट भारी पड़ी. पाकिस्तानी जवान अपना रशद भी छोड़कर भाग खड़े हुए. हमलोग इस पोजीशन पर थे कि अगर हमारा नेतृत्त्व चाहता तो हम पाकिस्तान के कई इलाके पर कब्जा कर लेते. लेकिन हमारा नेतृत्त्व अत्यंत विवेकशील था. विषम परिस्थितियों में भी बुलंद हौसलों के बल पर हम जीतकर आए और आज हम ऑपेरशन विजय का रजत जयंती समारोह मना रहे हैं. कार्यक्रम में आए सभी वीरों का अभिनंदन 34 बिहार बटालियन एनसीसी के कमांडिंग अफसर कर्नल नितिन झा ने किया. मंच संचालन कैप्टन मनोज चौधरी ने किया. कार्यक्रम में कारगिल युद्ध पर एक लघु चलचित्र का प्रदर्शन किया गया. इस अवसर पर 34 बिहार बटालियन एनसीसी के सूबेदार मेजर के.बी.आले, ट्रेनिंग जेसीओ सूबेदार संजय कुमार, नायब सूबेदार कमल गुरुंग सहित सभी जेसीओ एवं एनसीओ, जीसीआई निधि, सेकंड अफसर मो.शमशीर, सेकंड अफसर एस.एन.के.शर्मा, सीनियर कैडेट राघवेन्द्र कुमार, मनीष कुमार सिंह, प्रत्यक्षा प्रिया, काजल कुमारी, लक्ष्मी कुमारी, सीनियर एवं जूनियर डिवीजन के दो सौ व सीनियर एवं जूनियर विंग की एक सौ कैडेट उपस्थित थे. साथ ही भूतपूर्व सैनिक संघ के भी कई सदस्य उपस्थित थे. कार्यक्रम के सफल संचालन में अरविंद कुमार, महेश कुमार एवं अशोक कुमार की सराहनीय भूमिका रही.
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