Madhubani Mandi Bhav: सलोनी से सफोला तक सब कुछ हुआ महंगा, बजट बनाने से पहले चेक करें तेल-चावल के नए रेट

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फल, सब्जी, तेल और अनाज का फोटो

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Madhubani Mandi Bhav: मधुबनी की गिलेशन मंडी में शनिवार 6 जून को सरसों तेल, रिफाइंड और चावल की कीमतों में भारी उछाल आया है. ईंधन के दाम बढ़ने का सीधा असर रसोई के बजट पर दिख रहा है.

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Madhubani Mandi Bhav: ईंधन की महंगाई का सीधा असर अब आम आदमी की थाली पर दिखने लगा है. मधुबनी की प्रसिद्ध गिलेशन मंडी में शनिवार, 6 जून 2026 को किराना सामानों की कीमतों ने आम उपभोक्ताओं को तगड़ा झटका दिया है. डीजल-पेट्रोल के दाम क्या बढ़े, माल ढुलाई के बहाने खाद्य तेल से लेकर चावल तक के तेवर कड़े हो गए हैं. अचानक आई इस तेजी से गृहणियों की रसोई का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है.

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अगर आप आज राशन की खरीदारी करने बाजार निकलने वाले हैं, तो मोल-भाव और ठगी से बचने के लिए गिलेशन मंडी के वर्तमान रेट्स की विस्तृत सूची नीचे देख सकते हैं.


सरसों और रिफाइंड तेल में ₹15 तक का जोरदार उछाल

रसोई के बजट को सबसे ज्यादा झटका सरसों तेल और रिफाइंड की कीमतों ने दिया है. बाजार के मिजाज को देखें तो सलोनी और पहलवान जैसे लोकप्रिय ब्रांड्स पर प्रति लीटर ₹10 की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वहीं प्रीमियम क्वालिटी के सफोला गोल्ड ने इस बार मिडिल क्लास परिवारों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ा दी है.

विभिन्न ब्रांड्स के पुराने और नए रेट्स की तुलनात्मक तालिका नीचे दी गई है:

खाद्य सामग्री / प्रमुख ब्रांडपहले का भाव (₹)आज का नया भाव (₹)बाजार में शुद्ध बढ़ोतरी (₹)
सफोला गोल्ड (प्रति लीटर)₹195₹210₹15 की भारी तेजी
सलोनी सरसों तेल (प्रति लीटर)₹165₹175₹10 का उछाल
पहलवान सरसों तेल (प्रति लीटर)₹180₹190₹10 का इजाफा
इंजन तेल (प्रति लीटर)₹195₹200₹5 प्रति लीटर की तेजी
फॉर्च्यून रिफाइंड (प्रति लीटर)₹145₹150₹5 की बढ़ोतरी

चावल की हर वैरायटी भी हुई महंगी, ₹3 से ₹4 प्रति किलो की वृद्धि

सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि खाद्यान्न बाजार भी इस समय महंगाई की तपिश से सुलग रहा है. मंडी के बड़े आढ़तियों के मुताबिक, कतरनी, बासमती और मंसूरी सहित चावल की हर छोटी-बड़ी वैरायटी में ₹3 से ₹4 प्रति किलोग्राम की तेजी आ गई है. थोक बाजार में आ रही इस तेजी का सीधा असर खुदरा कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है, जिससे थाली का स्वाद महंगा हो गया है.


परिवहन लागत ने बिगाड़ा खेल, आढ़तियों ने दी यह बड़ी सलाह

गिलेशन मंडी के थोक डीलरों और आढ़तियों का साफ कहना है कि बाहरी राज्यों और मिलों से आने वाले माल का फ्रेट चार्ज (भाड़ा) काफी बढ़ चुका है. जब तक ईंधन की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक किराना सामग्रियों के दामों में नरमी की संभावना बेहद कम है.

मंडी का अंदरूनी सच: माल ढुलाई महंगी होने की वजह से खुदरा दुकानदारों के पास भी दाम बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. ऐसे में उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने रिहायशी इलाकों की स्थानीय दुकानों पर जाने से पहले मुख्य मंडी के इन आधिकारिक रेट को बेंचमार्क मानकर ही अपने बजट की योजना बनाएं ताकि कोई उनसे अतिरिक्त वसूली न कर सके.

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