मॉडल अस्पताल बनाने की मिली स्वीकृति पर दवा की कमी से जूझ रहा एनएससीयू

Updated at : 31 Jan 2020 1:11 AM (IST)
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मॉडल अस्पताल बनाने की मिली स्वीकृति पर दवा की कमी से जूझ रहा एनएससीयू

मधुबनी : एक ओर स्वास्थ्य महकमा सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल बनाने के लिये कदम बढ़ा रहा है. इसके लिये 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी गयी है तो दूसरी ओर एसएनसीयू की स्थिति ही नहीं सुधर पा रही है. सालों से कभी दवा की किल्लत तो कभी चिकित्सक तो कभी वारमर की खराबी […]

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मधुबनी : एक ओर स्वास्थ्य महकमा सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल बनाने के लिये कदम बढ़ा रहा है. इसके लिये 25 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी दी गयी है तो दूसरी ओर एसएनसीयू की स्थिति ही नहीं सुधर पा रही है. सालों से कभी दवा की किल्लत तो कभी चिकित्सक तो कभी वारमर की खराबी से एसएनसीयू जूझ रहा है. इन दिनों एसएनसीयू में चिकित्सक के छुट्टी पर चले जाने के कारण यहां पर नवजात को इलाज की परेशानी हो रही है.

एसएनसीयू में दो नवजात चमकी व दो जौंडिस(पीलिया) से पीड़ित हैं. परिजन इन बच्चों की जान बचाने के लिये इसमें भर्ती तो करा दिया है, पर इनका इलाज चिकित्सक नहीं कर रहे हैं. भर्ती नवजात की चिकित्सीय और देखभाल की जिम्मेदारी ए ग्रेड के सहारे किया जा रहा है. शिशु रोग विशेषज्ञ के छुट्टी पर जाने के कारण परिजन भी परेशान हैं.
उन्हें अपने नवजात को निजी एसएनसीयू में भर्ती कराने की मजबूरी है. हालांकि आर्थिक रूप से कमजोर परिजन ए ग्रेड के भरोसे ही अपने नवजात को एसएनसीयू में भर्ती करते हैं. विदित हो कि 16 रेडियेंट वारमर में 3 रेडियेंट खराब है. वहीं 13 रेडियेंट वारमर में महज 6 नवजात ही भर्ती हैं. इसके अलावा दवा की भी किल्लत है. शिशु रोग विशेषज्ञ के छुट्टी पर लाने के बाद एसएनसीयू में भर्ती नवजातों के लिये अस्पताल प्रबंधन द्वारा शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक को वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं किया गया है.
परिजन की बढ़ी परेशानी
एसएनसीयू में शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक के नहीं रहने से परिजनों को परेशानी काफी बढ़ गयी है. गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात को निजी एसएनसीयू में रखने को मजबूरी है. वहीं नवजात को चिकित्सीय व्यवस्था के लिये ए ग्रेड ही विकल्प है. एसएनसीयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को गंभीर बीमारी से ग्रसित तीन नवजातों के परिजन एसएनसीयू में आयी.
कार्यरत ए ग्रेड नर्स द्वारा परिजनों को बताया गया कि शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है. जिसके बाद 2 परिजनों ने अपने नवजात को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया. लेकिन एक परिजन ने भर्ती करने से इनकार करते हुए उसे निजी क्लीनिक में ले गये.
एसएनसीयू में भर्ती नवजात के कई परिजनों ने बताया कि सिस्टर भी अच्छे से देख भाल कर रही है. शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सदर अस्पताल में स्थापित एसएनसीयू अपने स्थापना काल से ही समस्याओं से जूझ रहा है. जहां कभी दवा की किल्लत, कभी रेडियेंट वारमर की खराबी तो कभी क्षमता से अधिक नवजात की भर्ती सामान्य समस्या है.
विगत कई माह से एक संविदारत शिशु विशेषज्ञ चिकित्सक डा. धीरेंद्र कुमार झा ही पदस्थापित है. जिनके जिम्मे चाइल्ड ओपीडी सहित एसएनसीयू के भर्ती मरीजों को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेवारी है. एसएनसीयू सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में कार्यरत चिकित्सक 28 जनवरी से एक सप्ताह के लिए छुट्टी पर हैं.
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