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अब बेटी के जन्म पर रोने के दिन गये : CM नीतीश

Updated at : 19 Jan 2019 8:44 PM (IST)
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अब बेटी के जन्म पर रोने के दिन गये : CM नीतीश

मधुबनी : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में पहले बेटी के जन्म लेने पर परिवार के सदस्य रोते थे. बिटिया की पढ़ाई, उसके विवाह की चिंता होती थी. लेकिन, अब बेटियों के जन्म पर रोने के दिन नहीं है. बेटी के जन्म से लेकर उसके स्नातक तक की पढाई, पोशाक का खर्च […]

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मधुबनी : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में पहले बेटी के जन्म लेने पर परिवार के सदस्य रोते थे. बिटिया की पढ़ाई, उसके विवाह की चिंता होती थी. लेकिन, अब बेटियों के जन्म पर रोने के दिन नहीं है. बेटी के जन्म से लेकर उसके स्नातक तक की पढाई, पोशाक का खर्च और प्रोत्साहन राशि राज्य सरकार दे रही है. यह करीब 54100 रुपये है. यह सब इसलिए है कि बेटी आत्मनिर्भर हों और बेटी के जन्म लेने पर बेटे की तरह ही परिवार में खुशियां मनायी जाये. मुख्यमंत्री शनिवार को जिला के घोघरडीहा के गरवा गांव में स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय अनंतलाल कामत की 108 वी जयंती पर उनकी प्रतिमा के अनावरण के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बेटियों के जन्म के साथ ही दो हजार रुपये माता पिता को देती है. वहीं, आधार लिंक करा लेने पर एक साल बाद फिर एक हजार रुपये और दो साल में पूरा टीका लगा लेने पर अलग से दो हजार रुपये सरकार देती है. यह प्रोत्साहन राशि है. इसके साथ ही बेटियों की पढाई, साईकिल राशि, पोशाक राशि भी सरकार दे रही है. इसके साथ ही कन्या उत्थान योजना, कन्या विवाह योजना भी शुरू किया जा चुका है.

मुख्यमंत्री ने बाल विवाह, दहेज जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए लोगों का आह्वान किया और कहा कि सरकार ने इसके लिए भी अभियान छेड़ दिया है. बाल विवाह व दहेज प्रथा उन्मूलन के लिए अभियान चलाया जा रहा है. कड़े कानून बनाये गये हैं. पर इसमें समाज का भी सहयोग चाहिए. उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि दहेज लेने वाले और देने वाले दोनों का सामाजिक स्तर पर बहिष्कार करें. कहा कि जो लोग अपने बेटे की शादी में दहेज लेते हैं उस शादी में ही शामिल नहीं हों. मुख्यमंत्री ने कहा कि न्याय के साथ विकास तभी अनवरत जारी रहेगा, जब समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारा व अमन चैन कायम रहे. आप किसी भी धर्म के हों, कोई परेशानी नहीं है. आप दूसरे के धर्म, मजबह, पर्व का सम्मान करें. इससे आपसी सद्भाव बना रहेगा. जब कहीं कभी किसी जगह पर झगड़ा होता है तो विकास के काम रूक जाते हैं. इसलिए आपस में मिलकर रहे.

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