ट्रैफिक : कागज पर ही बन कर रह जाती है रणनीति

Published at :31 Jan 2018 3:54 AM (IST)
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ट्रैफिक : कागज पर ही बन कर रह जाती है रणनीति

मधुबनी : शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है. ऐसा कभी नहीं देखा जाता जब लोग जाम में न फंसते हों. प्रत्येक दिन इसके कारण लोग रेंगते रहते हैं. इसके लिए आम लोग, व्यवसायी से लेकर प्रशासनिक स्तर तक जवाबदेह है. जाम की सबसे बड़ी समस्या शहर में अतिक्रमण है. इससे निबटने […]

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मधुबनी : शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है. ऐसा कभी नहीं देखा जाता जब लोग जाम में न फंसते हों. प्रत्येक दिन इसके कारण लोग रेंगते रहते हैं. इसके लिए आम लोग, व्यवसायी से लेकर प्रशासनिक स्तर तक जवाबदेह है. जाम की सबसे बड़ी समस्या शहर में अतिक्रमण है. इससे निबटने के लिए प्रशासन की हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है.

बढ़ती आबादी के साथ अतिक्रमण का सिलसिला जारी रखने से जाम की समस्या से निजात मिलना नामुमकिन साबित हो रहा है. शहर के विभिन्न हिस्सों में फुटपाथी विक्रेताओं के अलावा बालू, गि‍ट्टी, सीमेंट, लोहा के अलावा अन्य सामान को सड़क किनारे रखे जाने से जाम विकट समस्या बन चुकी है. शहरी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने में प्रशासन लगातार पिछड़ रहा है.

कम होती जा रही सड़क की चौड़ाई : अतिक्रमण के कारण शहर के अधिकांश चौक-चौराहों से गुजरने वाली सड़क की चौड़ाई कम होती जा रही है. शहर की अधिकांश सड़कों की चौड़ाई 20 से 25 फुट है. इन सड़कों के दोनों ओर करीब सात से आठ फुट सड़कें अतिक्रमित हैं. शेष सड़कों पर सड़क के दोनों किनारे करीब 18 फुट पर दो तथा चार पहिया वाहन लगे रहते हैं. ऐसे में जाम लगना लाजिमी है.
बैठक तक सिमटी रणनीति : शहर के जाम की समस्या व अतिक्रमण खाली कराने को लेकर जिलास्तरीय बैठक की जाती है. इन बिंदुओं पर अनुपालन के लिए व्यापक चर्चा होती है. पर, शहर की समस्या देख ऐसा प्रतीत होता है कि निर्णय बैठक तक ही सीमित रह जाती है. 11 जनवरी को जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में पदाधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें निर्णय के बाद अधिकारियों को जिला पदाधिकारी ने कई आवश्यक निर्देश भी दिये. 15 दिनों से पहले हुई बैठक का शहर की इन समस्याओं पर कोई असर नहीं दिखा. हमेशा की तरह जाम में लोग रेंगते नजर आ रहे हैं.
नहीं हो सका अतिक्रमण खाली : जिला प्रशासन से लेकर नगर परिषद प्रशासन अतिक्रमण खाली कराने में उदासीन है. नगर परिषद द्वारा नवंबर माह में अभियान चलाने का निर्णय लिया गया था. एक दो जगह पर स्थानीय लोगों के सहयोग से अतिक्रमण खाली भी कराया गया. यह अभियान पूरी तरह फ्लॉप साबित हो गया. शहर में न ही अतिक्रमण खाली हुई और न ही जाम की समस्या का हल हो सका. ऐसी स्थिति में इन समस्याओं का हल कैसे होगा.
जाम से बढ़ रही प्रदूषण की समस्या
शहर में ट्रैफिक व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होने से प्रदूषण बढ़ता जा रहा है. बढ़ती हुई जनसंख्या एवं गाड़ियों की संख्या का सीधा असर देखा जा रहा है. यातायात व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होने के कारण लोग अपने वाहनों को बंद न कर घंटों स्टार्ट ही रखते है. इससे निकलने वाली धुआं से वायु दूषित होती है. इसका सीधा असर पेड़-पौधे व अन्य प्राणियों पर पड़ता है.
जाम की समस्या से नहीं मिल रहा निजात
पुलिस बल का अभाव
3.5 वर्ग मील की इस शहर में यातायात व्यवस्था के लिए पुलिस बल का अभाव है. करीब एक लाख आबादी वाले इस शहर में करीब 10 हजार वाहन को परिचालन नियमित होता है. प्रत्येक चौक चौराहों पर यातायात पुलिस का अभाव है. यातायात व्यवस्था की देखरेख के लिए एक एसआइ, एक एएसआइ तथा 10 होमगार्ड के जवान प्रतिनियुक्त हैं.
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