निर्देश के बाद भी स्कूली बसों में नहीं लगा स्पीड गवर्नर

Published at :17 Nov 2017 6:18 AM (IST)
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निर्देश के बाद भी स्कूली बसों में नहीं लगा स्पीड गवर्नर

पहल की जरूरत. बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा मधुबनी : स्कूली बसों में गति सीमा निर्धारण का आदेश कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है. ऐसा लगता है जैसे बेलगाम वाहनों की जांच में विभाग पूरी तरह से घुटने लेक दी है. यहां बता दें कि स्कूली बसों में 40 किमी प्रति घंटे, ट्रक […]

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पहल की जरूरत. बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

मधुबनी : स्कूली बसों में गति सीमा निर्धारण का आदेश कागजी खानापूर्ति बनकर रह गया है. ऐसा लगता है जैसे बेलगाम वाहनों की जांच में विभाग पूरी तरह से घुटने लेक दी है.
यहां बता दें कि स्कूली बसों में 40 किमी प्रति घंटे, ट्रक व छोटे कामर्शियल वाहनों में 60 किमी प्रति घंटे की गति तय की गई है. लेकिन इनमे से एक भी वाहन इस गति में चलता नजर नहीं आयेगा. गौरतलब है कि रेयान में स्कूली छात्र के साथ घटित घटना के बाद स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्कूल संचालकों के साथ बैठक में कई सुरक्षात्मक उपायों पर चर्चा की गई थी. लेकिन जिलेभर में अब तक सिर्फ दो-तीन स्कूल की बसों में ही स्पीड गवर्नर लगाया जा सका है.
इतना ही नहीं केन्द्रीय परिवहन मंत्रालय ने भी सभी भारी व कमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य कर दिया है. परिवहन विभाग के पास भी कोई डिवायस या यंत्र नहीं है जिसके सहारे बंद या चल रहे वाहनों की गति की जांच की जा सके.
परिवहन शुल्क के नाम
पर होता है शोषण
परिवहन शुल्क के नाम पर निजी स्कूल संचालक मोटी रकम वसूलने से नहीं चुक रहे हैं. लेकिन सुरक्षा के मामले में ये विद्यालय कोताही बरत रहे. स्कूली वाहन के परिचालन को लेकर कोर्ट भी सख्त है. लेकिन संचालक कोर्ट के दिशा निर्देश को भी नजर अंदाज कर रहे हैं.
स्कूल बस संचालन के ये हैं नियम
निजी ऑपरेटर वाहन को मानक के अनुरूप बनाने और पंजिकृत कराने के बाद ही स्कूली वाहन के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. स्कूली वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं बैठाया जा सकता है. स्कूल बसों की पहचान के लिये बस के आगे पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए. बसों में चढ़ने के लिये फुटबोर्ड व फुट स्टेप्स होनी चाहिए. बसों में आपातकालीन द्वारा होना चाहिए. स्कूली बस का रंग पीला होने के साथ ब्राउन लाइनिंग होनी चाहिए. चालक को पांच वर्ष का अनुभव, स्कूली वाहन में प्राथमिक उपचार कीट, वाहनों के दरवाजे में लॉक की व्यवस्था एवं बसों में आगे से चढ़ने व पीछे से उतरने नियम होना चाहिए.
रजिस्ट्रेशन व फिटनेस निरस्त करने की होगी कार्रवाई
जिलाधिकारी द्वारा ऐसे मामलों की देखरेख के लिये शिक्षा विभाग को निर्देशित किया गया है. अभियान चलाकर ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन और फिटनेस निरस्त करने की कार्रवाई की जायेगी.
सुजीत कुमार, जिला परिवहन पदाधिकारी
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