नई शिक्षा नीति की डगर मुश्किल, इंटर्नशिप के इंतजार में बीत रहा सत्र

Published by :Kumar Ashish
Published at :28 Apr 2026 6:28 PM (IST)
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नई शिक्षा नीति की डगर मुश्किल, इंटर्नशिप के इंतजार में बीत रहा सत्र

नई शिक्षा नीति की डगर मुश्किल, इंटर्नशिप के इंतजार में बीत रहा सत्र

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सत्र 2023-27 के छात्र अधर में, 2024-28 की योजना का भी अता-पता नहीं, नीति शानदार पर तालमेल का अभाव मधेपुरा. भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. सरकार की महत्वाकांक्षी नीति के तहत स्नातक सत्र 2023-27 के छात्रों के लिए अनिवार्य इंटर्नशिप की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है. विडंबना यह है कि जिस समय तक छात्रों की कक्षाएं और व्यावहारिक प्रशिक्षण संपन्न हो जाने चाहिए थे, उस समय विश्वविद्यालय अब तक शुरुआती तालमेल ही बिठा रहा है. छात्रहित में सरकार की नीति सराहनीय, पर जमीनी हकीकत जुदा केंद्र व राज्य सरकार की नई शिक्षा नीति शिक्षा जगत में एक क्रांतिकारी कदम है. इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगारोन्मुख बनाना है. इंटर्नशिप इसी कड़ी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, ताकि छात्र कॉलेज से निकलते ही कार्यक्षेत्र के अनुभव से लैस हों. विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति छात्रों के सुनहरे भविष्य के लिए मील का पत्थर है, लेकिन बीएनएमयू में इसके क्रियान्वयन की कछुआ चाल ने छात्रों की चिंता बढ़ा दी है. दोहरे संकट में छात्र : पुराने का इंतजार, नए की चुनौती विश्वविद्यालय के पास फिलहाल दोहरी चुनौती है सत्र 2023-27 के इन छात्रों के लिए इंटर्नशिप अनिवार्य है, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के कारण प्रक्रिया ठप है. कक्षाओं का समय बीत चुका है, पर व्यावहारिक प्रशिक्षण का पोर्टल या गाइडलाइन धरातल पर नहीं दिख रही. हालांकि बीएनएमयू में सत्र भी नियमित नहीं हो सकी सत्र 2024-28 नए सत्र के छात्रों के लिए भी अब से ही योजना तैयार होनी चाहिए थी, ताकि पिछले सत्र जैसी देरी न हो, लेकिन फिलहाल विवि प्रशासन इस पर मौन है. तालमेल की कमी पड़ रही भारी नई शिक्षा नीति को लागू हुए समय बीत चुका है, लेकिन बीएनएमयू अब तक इसके साथ पूर्णतः सामंजस्य नहीं बिठा पाया है. संसाधनों की कमी या प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव, कारण जो भी हो, खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. नई शिक्षा नीति में इंटर्नशिप का प्रावधान छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के लिए किया गया है. यह सरकार की एक दूरदर्शी सोच है. यदि विश्वविद्यालय इसे समय पर लागू करता है, तो हमारे ग्रामीण क्षेत्र के छात्र भी तकनीकी रूप से दक्ष हो सकेंगे. मुख्य बिंदु जो ध्यान खींचते हैं नई शिक्षा नीति के तहत इंटर्नशिप अब ऐच्छिक नहीं, बल्कि डिग्री का अनिवार्य हिस्सा है. सत्र 2023-27 की प्रक्रिया में विलंब से परीक्षा कैलेंडर पर भी असर पड़ने की आशंका. छात्र संगठन और अभिभावक मांग कर रहे हैं कि विवि जल्द से जल्द पोर्टल खोलकर कंपनियों और संस्थानों के साथ एमओयू साइन करे. प्रभात खबर की अपील शिक्षा के इस नए युग में सरकार की नीतियां छात्रों के सशक्तिकरण के लिए हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन को चाहिए कि वे इन नीतियों को गंभीरता से लागू करें ताकि कोसी-सीमांचल के छात्रों का भविष्य उज्ज्वल हो सके.

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