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सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में कला, खेल और परियोजना के समावेशन शिक्षकों के लिए जरूरी

Updated at : 22 Jan 2025 7:30 PM (IST)
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सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में कला, खेल और परियोजना के समावेशन शिक्षकों के लिए जरूरी

शिक्षकों का परिक्षण शुरू

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प्रतिनिधि, मधेपुरा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में शिक्षकों के क्षमता संर्वधन के लिए प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय सुखासन मधेपुरा में पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है. प्राचार्य डॉ संजीव कुमार झा ने बताया कि प्रशिक्षण में शिक्षण की मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने के लिए बेहतर और प्रभावी ढंग से बच्चों को सिखाने में दक्ष हो के बारे में बताया जा रहा है. प्रस्तुत मॉड्यूल बुनियाद 3 वर्ग 1-5 तक के शिक्षकों के लिए विकसित किया गया है. इसमें भाषा, गणित और पर्यावरण अध्ययन के सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में कला, खेल और परियोजना के समावेशन पर जोर दिया गया है. ताकि पाठ, विषय से संबंधित अवधारणा स्पष्ट हो सके. इस प्रकार अवधारणाओं के स्पष्ट और सुदृढ़ होने के साथ-साथ उन्हे आनंद की भी अनुभूति होगी, आलोचनात्मक चिंतन का विकास होगा, साथ ही साथ खोज आधारित, चर्चा आधारित, विश्लेषण आधारित अधिगम के अलावे प्रश्न पूछने की संस्कृति का निर्माण होगा. बच्चे जब स्वयं करके सीखेंगे, तो सेल्फ लर्नर बन सकेंगे. इससे बच्चों में स्वतः पहल करने, स्व-निर्देशन, स्व-अनुशासन व टीम भावना तथा अपने प्रति जिम्मेदारी की भावना का विकास संभव है. इस मॉड्यूल में प्रत्येक दिन सात सत्र हैं, जिसमें पहला सत्र योग और पीटी का है तथा अंतिम सत्र में आइसीटी को रखा गया है, जिसकी जानकारी हर शिक्षक के लिए आवश्यक है. पहले दिन में आरटीइ के मुख्य प्रावधान, अध्यापकों के दायित्व व भूमिका, सीखने के वातावरण का निर्माण, प्रभावी चेतना सत्र और प्रभावी प्रतिवेदन लेखन है. दूसरे दिन बुधवार को कला समेकित अधिगम तथा कला के माध्यम से भाषा, गणित और पर्यावरण अध्ययन शिक्षण, गतिविधि आधारित शिक्षण और शिक्षण गतिविधियों का निर्माण, तीसरे दिन खेल आधारित भाषा गणित और पर्यावरण शिक्षण, चौथे दिन विद्यालय भ्रमण और पांचवे दिन भ्रमण संबंधी फीडबैक और प्रस्तुतीकरण तथा छठे दिन भाषा, गणित तथा पर्यावरण अध्ययन में परियोजना आधारित अधिगम की बात की गयी है. इसके अतिरिक्त एचपीसी, भाषा, गणित तथा पर्यावरण में आकलन तथा परियोजना आधारित गतिविधियों का निर्माण सम्मिलित है. यह मॉड्यूल शिक्षकों के सिखने-सिखाने की प्रक्रिया में नवाचार लाएगा तथा बच्चे आनन्दायी वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में सक्रिय होंगे. महाविद्यालय के विशेषज्ञ अभिषेक आनंद के द्वारा प्रशिक्षण में कला समेकित अधिगम विषय पर चर्चा की. कला समेकित अधिगम के माध्यम से बच्चों को किस प्रकार शिक्षा प्रदान करना है उन्होंने विस्तार से बताया. वहीं प्रशिक्षु शिक्षकों के द्वारा प्रोजेक्ट का प्रदर्शन किया, और उसके बारे में बेहतर तरीके से जानकारी दी. इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न विद्यालयों से 178 शिक्षक व शिक्षिका भाग लिए हैं. महाविद्यालय के बेहतरीन माहौल में सभी को बेहतर सुविधा दी जा रही. प्राचार्य ने सभी प्रशिक्षुओं को किसी प्रकार की समस्या होने पर सूचना देने की बात कही है. नोडल पदाधिकारी मो मुसफिक आलम, प्रशिक्षण प्रभारी प्रभाकर कुमार, प्रशिक्षक में आनंद कुमार पुष्प, संजीत कुमार, स्वाति कुमारी, डॉ रंजना कुमारी, अंजली आनंद, महाविद्यालय के एडमिन प्रदीप कुमार शामिल हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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