समानता को ले बढ़ रहा पंसस में आक्रोश

Published at :21 Mar 2017 12:56 AM (IST)
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समानता को ले बढ़ रहा पंसस में आक्रोश

विरोध . 27 मार्च को करेंगे विधानसभा के समक्ष धरना, राज्य भर से जुटेंगे पंसस व प्रमुख मांगों के समर्थन में बैठे धरना पर, की नारेबाजी मधेपुरा : भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम के तहत बिहार में पंचायती राज अधिनियम 2006 के अधीन त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला […]

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विरोध . 27 मार्च को करेंगे विधानसभा के समक्ष धरना, राज्य भर से जुटेंगे पंसस व प्रमुख

मांगों के समर्थन में बैठे धरना पर, की नारेबाजी
मधेपुरा : भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम के तहत बिहार में पंचायती राज अधिनियम 2006 के अधीन त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद तीन स्तर है, जो एक दूसरे का पूरक के रूप में मजबूती प्रदान कर पंचायती राज व्यवस्था को धरातल पर उतारने में सहायक है. पंचायत चुनाव 2001 के शुरू में तीनों स्तरों को बराबर का अधिकार था, लेकिन कुछ वर्षों के बाद ग्राम पंचायत की अपेक्षा पंचायत समिति के अधिकारों में कटौती होती आ रही है. जिससे इनके प्रतिनिधि उपेक्षित महसूस कर रहे हैं तथा जनता की आशाओं पर खड़े उतरने के बजाय उनके उपहास के शिकार बन रहे हैं.
पंचायत चुनाव 2001 के शुरू में ग्राम पंचायत को जिन जिन मदों से राशि मिलती थी, उन सभी मदों से पंचायत समिति को भी राशि मिलती थी. जिससे सभी स्तरों के प्रतिनिधियों में सम्मान और समानता का भाव था. न्याय के साथ विकास के मद्देनजर प्रदेश पंसस-उपप्रमुख-प्रमुख संघ, बिहार पंचायत समितियों से छीने गये अधिकार वापस करने की ओर आपका ध्यान आकृष्ट कर अपनी मांगे रखते हुये मनरेगा कानून के अंतर्गत मनरेगा योजना का क्रियान्वयन करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है.
लेकिन वर्तमान समय में पंचायत समितियों से हटाकर मात्र ग्राम पंचायत में ही रहने दिया गया है. हर विकास योजना में पंचायत समिति की भागीदारी लगातार कम हो रही है. जिला मुख्यालय में जुटे प्रमुख एवं पंसस ने इस मामले में हुंकार भरते हुए सोमवार को एक दिवसीय धरना दिया. धरना की अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष जयकांत यादव ने की.
विकास अवरुद्ध होने से पंसस में निराशा . पंचायत समितियों के क्षेत्रों का विकास अवरूद्ध होने से इनके प्रतिनिधियों में निराशा का भाव उत्पन्न हुआ है. 14 वीं वित्त आयोग मद से पंचायत चुनाव 2001 के शुरू की तरह 30 प्रतिशत राशि पंचायत समितियों को केंद्र सरकार से दिलाने. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2001 के शुरू में ग्राम पंचायत की राशि का क्रियान्वयन ग्राम पंचायत के मुखिया एवं पंचायत सचिव के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता था,
उसी प्रकार से पंचायत समिति की राशि का क्रियान्वयन पंचायत समिति के प्रमुख एवं कार्यपालक पदाधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से किया जाता था, लेकिन ये अधिकार केवल ग्राम पंचायत के मुखिया को रहने दिया गया है और पंचायत समिति के प्रमुख से छीन लिया गया है, जिससे समानता का भाव खत्म हो चुका है.
मिले अधिकार, लें अनुपस्थिति विवरणी ताकि लगे व्यवस्था पर लगाम . पुन: ग्राम पंचायत के मुखिया के समान पंचायत समिति की राशि का कार्यान्वयन प्रमुख एवं कार्यपालक पदाधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से करने का अधिकार देने. त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के सभी पंचायत प्रतिनिधियों को उनके पद के अनुरूप सांसद एवं विधायक के समान वेतन,
भत्ता एवं पेंशन की सुविधाएं देने. पंचायत समिति के प्रमुख तथा उप प्रमुख को वाहन एवं अंगरक्षक की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय ताकि सुचारू रूप से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके. पंचायत समिति के सदस्यों को भी जन वितरण प्रणाली की दुकान जैसी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की अनुशंसा एवं कार्यान्वयन में भागीदार बनाने. प्रखंड अंतर्गत किसी भी विभाग की संचिका का निष्पादन प्रमुखों के अनुमोदनोपरांत सुनिश्चित करवाने.
अंत में प्रदेश पंसस उपप्रमुख प्रमुख संघ बिहार की अपेक्षित मांगों पर सम्यक रूप से विचार करते हुये त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को समानता के भाव से सुदृढ़ीकरण में अहम भूमिका निभाने की कृपा की जाय ताकि प्रदेश में न्याय के साथ विकास का नारा चरितार्थ हो सके. प्रदेश अध्यक्ष जयकांत यादव, सिंहेश्वर प्रमुख चंद्रकला देवी, शंभू प्रसाद यादव, पिंटू यादव, मनोज साह, मोरसंडा पंसस मुकेश कुमार, गुलदेव यादव, जयप्रकाश यादव, विकास चंद्र यादव, सुमन देवी, शशि कुमार, सविता देवी, सरिता देवी, पवन रेखा देवी, वर्षा कुमारी, गुड्डू कुमार, मनोज सादा, दयानंद सिंह, प्रदीप साह, अशोक शर्मा, आदि शामिल थे.
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