ज्ञान का तिरस्कार खोलता है विनाश के द्वार

ज्ञान का तिरस्कार खोलता है विनाश के द्वार फोटो – मधेपुरा 03कैप्शन – नाटक का एक हास्य दृश्य फोटो – मधेपुरा 04कैप्शन – दर्शकों से खचाखच भरा रहा हॉल – नवाचार रंग मंडल की ओर से मधेपुरा में प्रस्तुत ‘कुमति नगर का किस्सा’ नाटक ने दिया संदेश – एमपी नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित कलाकार ने […]
ज्ञान का तिरस्कार खोलता है विनाश के द्वार फोटो – मधेपुरा 03कैप्शन – नाटक का एक हास्य दृश्य फोटो – मधेपुरा 04कैप्शन – दर्शकों से खचाखच भरा रहा हॉल – नवाचार रंग मंडल की ओर से मधेपुरा में प्रस्तुत ‘कुमति नगर का किस्सा’ नाटक ने दिया संदेश – एमपी नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित कलाकार ने पेश की अपनी प्रस्तुति प्रतिनिधि मधेपुरा. ज्ञान का तिरस्कार विनाश के द्वार खोलता है. ज्ञान की प्राप्ति के लिए केवल किताबों का पढ़ना जरूरी नहीं बल्कि इसके लिए शिक्षा का संस्कार से युक्त होना जरूरी है. बुधवार की देर शाम स्थानीय टीपी कालेज के सभा भवन में नवाचार रंग मंडल की ओर से आयोजित नाटक ‘ कुमति नगर का किस्सा’ के जरिये शिक्षा की आवश्यकता और संस्कार की जरूरत का संदेश बखूबी संप्रेषित किया गया. मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल से एक वर्ष का डिप्लोमा हासिल करने के बाद कलाकार मो शहंशाह ने मधेपुरा में एक नये नाट्य मंडल का गठन कर अपनी पहली प्रस्तुति दी. संसाधनों के अभाव के बावजूद नाटक ने अपना पूरा प्रभाव छोड़ा. राजकमल नायक द्वारा रचित हास्य शैली की इस नाटक के संवाद संप्रेषणीय थे. हालांकि प्रेक्षागृह नहीं होने के कारण कलाकारों की आवाज दूर तक नहीं पहुंच पा रही थी. प्रकाश संयोजन की कमी भी खल रही थी. इन सब संसाधनों की कमी के बावजूद नाटक अपना पूरा प्रभाव छोड़ने में सफल रही. लोग हंस -हंस कर लोटपोट हो रहे थे. वहीं नाटक के ब्लॉक अच्छे बन पड़े थे. कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को बांधे रखा. हॉल दर्शको ंसे खचाखच भरा था. तालियों की गड़गड़ाहट से हॉल गूंजता रहा. गुरू के ग्रंथ का सम्मान न कर लोगों को ठग कर भोजन प्राप्त करने वाला शिष्य सपने में कुमतिनगर पहुंच जाता है. इस राज्य में शिक्षित होने पर पाबंदी है. शिक्षा से अरूचि के कारण उसे कोतवाल बना दिया जाता है. इसके बावजूद कुछ लोग शिक्षा के प्रति जागरूकता फैला रहे लोगों को राज्य द्रोह का दोषी मान लिया जाता है. इनका नेतृत्व कर रहे गुरूजी को राजा सूली पर चढ़ाने का आदेश देता है, तभी कोतवाल बने शिष्य की चेतना जागृत हो जाती है. वह गुरू को सूली पर नहीं चढ़ाने के लिए राजा से प्रार्थना करता है. इस बीच उसकी नींद टूट जाती है. इसके बाद गुरू के ज्ञान के सम्मान का संस्कार उसमें जागृत हो जाता है. नाटक में गुरू की भूमिका शहंशाह ने निभायी वहीं आनंद, मो आतिफ,दीपक, रवि, इमरान, निशा कुमारी, निशा गुप्ता, बमबम, श्रीकांत, संदीप, आनंद, सुमित, एवं कार्तिक ने अपनी अच्छी उपस्थिति दर्ज करायी. वहीं संगीत अमित कुमार अंशु एवं रोशन ने दिया. मंच सज्जा, रूप सज्जा, वस्त्र आदि आदित्य कुमार, सोनी राज, मो रिजवान,विजय कुमार, राजीव कुमार, विश्वानाथ आदि का सहयोग रहा. ———- इनसेट ————-प्रतिभाओं के लिए कोई बाधा नहीं होती फोटो – मधेपुरा 05कैप्शन – कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद संबोधित करते अतिथि – टीपी कॉलेज के सभाभवन में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए वक्ताओं ने कहा प्रतिनिधिमधेपुरास्थानीय टीपी कॉलेज के सभाभवन में नवाचार रंगमंडल मधेपुरा ने अपनी पहली प्रस्तुति ‘कुमतिनगर का किस्सा’ का आयोजन किया. आयोजन का शुभारंभ टीपी कॉलेज के प्राचार्य डा एचएलएस जौहरी, डा भूपेंद्र नारायण मधेपुरी, प्रो श्यामल किशोर यादव, डा जवाहर पासवान, डा कपिलदेव प्रसाद, दशरथ प्रसाद सिंह कुलीश एवं ध्यानी यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि प्रतिभाओं के राह की बाधा कोई नहीं बन सकता. लेकिन इसके लिए प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देना होगा. वे आगे बढ़ने का रास्ता स्वयं खोजें. अपनी विफलताओं के लिए किसी को दोष नहीं दे कर स्वयं में कमी ढूंढ़े और आगे का रास्ता खोजें. प्राचार्य जौहरी ने कहाकि कला जीवन का अहम हिस्सा है. इसे आगे बढ़ना चाहिए. वहीं भूपेंद्र नारायण मधेपुरी ने कहा कि प्रतिभाओं के रास्ते में पैसे की बाधा को दूर करने के लिए वह हमेशा तत्पर रहते हैं और हमेशा रहेंगे. इसके बाद युवा गायक रोशन कुमार ने स्वागत गान प्रस्तुत किया. प्रिया एवं कशिश परवीन के नृत्य ने सबका मन मोह लिया. मंच संचालन हर्ष वर्द्धन सिंह राठौर एवं अमित कुमार अंशु ने किया. इस मौके पर हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर अरविंद श्रीवास्तव, बीएनएमयू के कुलानुशासक डा विश्वनाथ विवेका, प्रो डा अरूण कुमार, प्रो ललन अद्री, भारत भूषण आदि मौजूद थे.
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